रनवे की दृश्यता मापने वाला पहला स्वदेशी ट्रांसमिसोमीटर ‘दृष्टि’

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रनवे की दृश्यता मापने वाले पहला स्वदेशी ट्रांसमिसोमीटर ‘दृष्टि’ और भारतीय सेना के लिए पहला स्वदेशी इलेक्ट्रोनिक टारगेट ‘ध्वनि’ जैसे : अनूठे उत्पाद विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ‘मेक-इन-इंडिया’ अभियान की सफलता के लिए ऐसे प्रयास जरूरी है।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रनवे की दृश्यता मापने वाले पहला स्वदेशी ट्रांसमिसोमीटर ‘दृष्टि’ और भारतीय सेना के लिए पहला स्वदेशी इलेक्ट्रोनिक टारगेट ‘ध्वनि’ जैसे : अनूठे उत्पाद विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की ‘मेक-इन-इंडिया’ अभियान की सफलता के लिए ऐसे प्रयास जरूरी है।

डा. हर्षवर्धन ने राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों से प्रधानमंत्री के ‘मेक-इन-इंडिया’ कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने का आहृवान किया।

सीएसआईआर के उपाध्यक्ष डा. हर्षवर्धन ने कहा है कि अंतरिक्ष एवं प्रतिरक्षा को ‘मेक-इन-इंडिया’ अभियान के मुख्य आधार के रूप में चिन्हित किया गया है। वह रविवार को बेंगलुरु में सीएसआईआर के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रयोगशाला (एनएएल) के वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे।

डॉ. हर्षवर्धन ने वैज्ञानिकों से प्रधानमंत्री के ‘मेक-इन-इंडिया’ कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने का आहृवान किया। उन्होंने कहा कि इन सामरिक क्षेत्रों को स्वदेशी प्रौद्योगिकी मुहैया कराने के पांच दशकों से भी ज्यादा के अपने अनुभवों के साथ सीएसआईआर- एनएएल इस स्थिति में पूरी तरह आ गया है कि वह अगले पांच वर्षो में घरेलू खरीद को 40 से बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक करने के प्रधानमंत्री के आहृवान को पूरा कर सके।

डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि अंतरिक्ष और प्रतिरक्षा पूरे विश्व में बेहद प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इन क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी का न मिलना और तकनीकों पर जबर्दस्त मालिकाना हक जैसे मुद्दों का दबदबा है। अंतरिक्ष को भारी निवेश व निर्माण-पूर्व लंबी अवधि वाले परियोजनाओं वाला क्षेत्र माना जाता है। फिर भी यह जरूरी हो गया है कि हम ऐसे नवाचारों को विकसित करें जिससे आने वाले समय में लाभ हो और अभिनव प्रौद्योगिकी को विकसित करने के साथ-साथ हमारे आयात को विकल्प मिले।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने सीएसआईआर के महानिदेशक डा. एम. ओ. गर्ग और एनएएल के निदेशक के साथ श्याम चेट्टी के साथ सीएसआईआर- एनएएल के विभिन्न प्रयोगशालाओं का दौरा किया।

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