हैदराबाद, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। तेलंगाना के वारंगल जिले में मंगलवार को भागने की कोशिश के दौरान अपने चार सहयोगियों के साथ मारा गया वकारुद्दीन 2010 में अपनी गिरफ्तारी से पहले ‘सर्वाधिक वांछित’ आतकंवादी था।
वह 2008 से 2010 के दौरान हैदराबाद के विभिन्न स्थानों पर पुलिसकर्मियों पर हमलों का मास्टरमाइंड था।
हैदराबाद के मलकपेट क्षेत्र का रहने वाला वकारुद्दीन पिछले कुछ सालों में शहर पर कई आतंकवादी हमलों को अंजाम दे चुके आतकंवादी शाहिद बिलाल से प्रभावित था। ऐसा माना जाता है कि शाहिद पाकिस्तान में मारा जा चुका है।
वकारुद्दीन और उसके सहयोगी पुलिसकर्मियों पर कम से कम तीन हमलों में शामिल थे, जिसमें दो पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे और अन्य घायल हो गए थे।
उसने अपनी गिरफ्तारी के बाद पुलिस को बताया था कि वह विस्फोट के बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस की गोलीबारी के लिए उनसे बदला लेना चाहता था।
पुलिस से मुताबिक, शुरुआत में वकारुद्दीन एक धार्मिक कट्टरपंथी संगठन दर्सगाह जिहाद-ओ-शहादत (डीजेएस) से जुड़ा हुआ था।
डीजेएस नेताओं के साथ मतभेद के बाद उसने अलग-अलग राज्यों में इन हमलों को अंजाम देने के लिए तहरीक गल्बा-ए-इस्लाम की स्थापना की।
वह गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अन्य नेताओं की हत्या की साजिश में भी शामिल था।
इस गिरोह ने पुलिस के साथ पूछताछ के दौरान स्वीकार किया था कि उन्होंने बैंक लूटने के दौरान 2007 में गुजरात में एक पुलिस हवलदार की गोली मार कर हत्या कर दी थी। उन्होंने हमलों के लिए धन जुटाने हेतु कई लोगों को लूटने की बात भी स्वीकारी।
साल 2011 में एक जेल अधिकारी की पिटाई के बाद वकारुद्दीन और अन्य आरोपियों को हैदराबाद की उच्च सुरक्षा वाली चरलापल्ली कारागार स्थानांतरित कर दिया था।
वकारुद्दीन वारंगल जेल में भी कर्मचारियों के साथ झगड़ा करता रहता था। वह भोजन और अन्य सुविधाओं के लिए अक्सर जेलकर्मियों के साथ झगड़ता था।
पुलसि सूत्रों ने कहा कि वह अदालत में सुनवाई के लिए उसे हैदराबाद ले जाने वाले पुलिसकर्मियों के साथ भी झगड़ता था। कई बार वह अपने और अन्य आरोपियों के लिए बिरयानी मुहैया कराने पर अड़ जाता था।
पिछले 10 दिनों से उन्हें प्रतिदिन वारंगल और हैदराबाद के बीच ले जाया जा रहा था। मंगलवार को भी उन्हें अदालत में सुनवाई के लिए हैदराबाद लाया जा रहा था।
पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने पुलिसकर्मियों पर उस समय हमला कर दिया और उनके हथियार छीनने की कोशिश की, जब लघुशंका के लिए वाहन को रोका गया था।
पुलिस ने दावा किया कि इस हाथापाई में उन्होंने गोलियां चला दी, जिसमें सभी आरोपियों की मौत हो गई।
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