आगरा, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और रामकृपाल यादव ने आगरा में बेमौसमी वर्षा और ओला गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं, सरसों और आलू की फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए मंगलवार को विभिन्न गांवों का दौरा किया।
अरुखास गांव में एकत्र हुए किसानों को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ है और उनके नुकसान को कम करने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।
उन्होंने कहा, “हमें राज्य सरकार से रपट लेने के लिए कहा गया है, जिसका अध्ययन किया जाएगा और तब पर्याप्त मुआवजा नीति की घोषणा की जाएगी।” उन्होंने किसानों से बैंक खाता खोलने के लिए कहा ताकि रियायत या राहत सीधे उनतक पहुंच सके।
गडकरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के कई दल गठित किए हैं जो वर्तमान में विभिन्न इलाकों का दौरा कर रहे हैं। उनकी रपट प्रधानमंत्री को कुछ दिनों में सौंपी जाएगी और समग्र नीति की घोषणा की जाएगी।
दौरे के दौरान किसानों ने गडकरी को रोक लिया और उन्हें खेतों की तरफ खराब मौसम से हुए अपने नुकसान का सीधा अवलोकन कराया।
किसानों ने कहा कि मंत्री जल्दबाजी में थे और उनके कई सवालों का उत्तर दिए बगैर चले गए।
सभा में मौजूद कई किसानों ने खुलासा किया कि संभवत: मंत्रियों का यह दौरा भूमि अधिग्रहण अध्यादेश से धूमिल हुई भारतीय जनता पार्टी की छवि की भरपाई का प्रयास के तौर पर था।
आगरा संभाग में 20 किसानों ने या तो आत्महत्या कर ली या दुख से उनकी मौत हो गई लेकिन सरकारी आंकड़े में केवल चार मौतें दर्शाई गई हैं।
संभाग में नौ लाख किसानों में से करीब पांच लाख पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और अब सीमांत किसान हैं। शेष चार लाख के पास बेहतर क्षमता है और फसलों को हुए नुकसान के बावजूद उनकी हैसियत बरकरार है।
किसान समुदाय के नेताओं ने आरोप लगाया कि जिला स्तर के अधिकारी नुकसान की वास्तविक स्थिति नहीं दर्शा रहे हैं। आगरा में नुकसान आधारित बीमा है जबकि मथुरा जिले में मौसम आधारित है।
बैनपुर के किसान जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस वर्ष खास तौर से भाजपा के सत्ता में आने के बाद किसानों को दो तरफा मार पड़ रही है। खरीफ फसलों पर बारिश की मार पड़ी है तो रबी को अधिक और बेसमय बारिश ने धो कर रख दिया है।
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