यौगिक क्रियाओं से बढ़ता है आत्मविश्वास

हरिद्वार, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। एक तरफ जहां दुनियाभर में किशोर-किशोरियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उनके माता-पिता चिंतित हैं, वहीं एक नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि यौगिक क्रियाओं से किशोरों की शैक्षिक चिंताएं दूर होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है।

हरिद्वार के 160 विद्यार्थियों (उम्र 13 से 19 साल के बीच) पर 45 दिनों तक अध्ययन किया गया। इसके लिए 80-80 विद्यार्थियों के दो समूह बनाकर प्राण चेतना के आदान-प्रदान पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।

अध्ययन के मुताबिक, इन किशोरों को 45 दिनों तक एक घंटा प्रतिदिन प्राण प्रत्यावर्तन साधना कराई गई, साथ ही अन्य यौगिक क्रियाएं भी कराई गईं।

अनुसंधानकर्ता मोनिका शर्मा का कहना है कि 45 दिनों बाद प्रारंभिक की तरह ही फिर से जांच की गई, जिसमें पाया गया कि प्रयोगात्मक समूह के किशोर-किशोरियों में नियंत्रित समूह की अपेक्षा शैक्षणिक चिंता की कमी तथा आत्मविश्वास व सृजनामक स्तर में वृद्धि पाई गई।

शोध में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्राण प्रत्यावर्तन साधना करने वाले किशोर-किशोरियों में मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार होते पाया गया। साथ ही यौगिक अभ्यासों का संपूर्ण व्यक्तित्व पर सकारात्मक प्रभाव दिखाई दिया। इस अध्ययन के अंतर्गत खेचरी मुद्रा, गायत्री महामंत्र जप, प्राणयोग, बिंदुयोग तथा नादयोग साधना आदि यौगिक क्रियाएं हैं, जो मस्तिष्क को शांत, स्थिर व प्रखर बनाती हैं।

यह अध्ययन हरिद्वार के देवसंस्कृति विश्व विद्यालय के मानवीय चेतना व योग विभाग द्वारा किया गया है। इसके जरिए किशोर एवं किशोरियों में मानसिक स्वास्थ्य और रचनात्मक क्षमता के विकास पर बहुत अच्छा प्रभाव होते देखे गए। प्राण प्रत्यावर्तन की साधना एक यौगिक क्रिया के साथ एक यौगिक चिकित्सा भी है।

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति व शोध के गाइड डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा, “हमने शोध में पाया कि योग व यौगिक क्रियायों के नियमित अभ्यास से शारीरिक, मानसिक के साथ आध्यात्मिक लाभ भी होते हैं।”

देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या का मानना है कि जब पूरा विश्व 21 जून को पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहा है, तब हमारे ऋषि प्रणीत इन क्रियाओं से भी दुनिया को अवगत कराना जाना चाहिए।

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