आस्ट्रेलिया में आयोजित होगी ‘राम कथा’ पेंटिग प्रदर्शनी

नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। रामायण की कहानी पर आधारित 101 चित्रों की प्रदर्शनी ‘राम कथा’ आस्ट्रेलिया के सबसे बड़े कला संग्रहालय में 22 मई से आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी तीन महीने तक चलेगी। इसके जरिए आस्ट्रेलिया के लोगों को भारत के दृश्य कला रूपों की झलक मिलेगी।

इस आशय की घोषणा यहां आस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री जूली बिशप ने सोमवार को की।

यहां जारी एक बयान के अनुसार, राष्ट्रीय संग्रहालय आस्ट्रेलिया के सबसे बड़े कला संग्रहालय में आयोजित होने वाली इस प्रदर्शनी में महाकाव्य पर आधारित 101 लघु पेंटिंग्स उधार के रूप में दे रहा है।

बयान के अनुसार, आस्ट्रेलिया में कैनबरा स्थित नेशनल गैलरी ऑफ आस्ट्रेलिया (एनजीए) अगले माह राष्ट्रीय संग्रहालय से राम कथा की कला श्रंखलाओं को प्राप्त करेगा। इनमें 17 वीं और 19 वीं शताब्दी के बीच की विभिन्न शैलियों के लघु चित्र हैं। इन्हें भारत के उत्तरी, मध्य और पूर्वी प्रदेशों से जमा किया गया है। कला कृतियों को 22 मई से तीन माह के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

नेशनल गैलरी ऑफ आस्ट्रेलिया की स्थापना 1967 में हुई थी।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री डॉ. महेश शर्मा के साथ सोमवार को हुई मुलाकात के दौरान बिशप ने इस आयोजन की औपचारिक घोषणा करते हुए विरासत को बढ़ावा देने के लिए देशों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

बिशप ने कहा, “हमें ऐसे अधिक प्रयास करने होंगे।” आस्ट्रेलिया के मंत्री ने राष्ट्रीय संग्रहालय का दौरा किया तथा ‘राम कथा’ श्रंखला देखी।

डॉ. शर्मा ने कहा कि आगामी प्रदर्शनी का उद्देश्य भारतीय लघु पेंटिंग्स, खास तौर पर देश के महान महाकाव्यों से जुड़ी लघु पेंटिंग्स के बारे में वैश्विक रुचि को जागृत करना है।

उन्होंने कहा, “एक तरफ यह प्रदर्शनी ऑस्ट्रेलिया में भारतीय दर्शकों के लिए उपहार हो सकती है तो दूसरी तरफ यह आस्ट्रेलियाई नागरिकों के बीच भारतीय संस्कृति के पहलुओं को पेश करती है। इससे दोनों देशों के बीच के सांस्कृतिक संबंधों को सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।”

राष्ट्रीय संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. वेणु वासुदेवन ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया का समृद्ध अतीत है, खास कर मौखिक संस्कृतियों के मामले में।

उन्होंने कहा, “यह प्रदर्शनी ऑस्ट्रेलियाई दर्शकों को रामायण की कहानी से परिचित कराने और अंतर्राष्ट्रीय इतिहास को और करीब लाने का एक महान अवसर साबित होगा।”

2,500 वर्षो से अधिक समय से लोगों की कल्पना पर हावी रहने वाली रामायण की कहानी पर आधारित चित्रों में से कालानुक्रमिक रूप से 101 चित्रों का चयन करने वाले राष्ट्रीय संग्रहालय के क्यूरेटर डॉ. विजय कुमार माथुर ने कहा कि यह संग्रह भारत की सबसे समृद्ध कलाकृतियों में से एक है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संग्रहालय ने 2013 में रामकथा प्रदर्शनी आयोजित की थी, उसके बाद इसे बेल्जियम में आयोजित किया गया।

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