मुंबई, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। शिवसेना ने जम्मू एवं कश्मीर के विस्थापित कश्मीरी पंडितों के उचित और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग की है, जिन्हें 25 साल पहले अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था।
पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मंगलवार को लिखा, “जम्मू एवं कश्मीर में अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) गठबंधन की स्थिर सरकार है और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मजबूत प्रशासन है। जम्मू एवं कश्मीर में चूंकि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की सरकार भाजपा के समर्थन से सत्ता में है, इसलिए उन्हें कश्मीरी पंडितों की ‘घर वापसी’ के बारे में जरूर फैसला लेना चाहिए।”
शिवसेना ने कहा कि चरमपंथियों के रिहा करने का सईद का फैसला और उनके पुनर्वास की बात करने से कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लेकर उनके प्रस्ताव पर आशंका पैदा हुई है।
पार्टी ने कहा, “सईद ने कश्मीरी पंडितों के लिए अलग इलाका तैयार करने की बात की है.. कहीं यह धरती पुत्रों के लिए झुग्गी या झुग्गी निर्माण परियोजना तो नहीं है?”
मुस्लिम समुदाय से मतदान का अधिकार वापस ले लेने की पार्टी की मांग से संबंधित विवाद का उल्लेख करते हुए इसने पूछा कि जम्मू एवं कश्मीर चुनाव में कितने कश्मीरी पंडित मताधिकार का इस्तेमाल कर पाए।
पार्टी के मुताबिक, “कुछ लोग मुसलमानों के मताधिकार को लेकर चीख-चिल्ला रहे हैं, लेकिन न ओवैसी (असदुद्दीन ओवैसी) और न ही अन्य धर्मनिरपेक्ष लोगों ने कभी कश्मीरी पंडितों के लिए यह बात कही। धार्मिक आधार पर उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने या जम्मू एवं कश्मीर में पाकिस्तान समर्थकों के लिए कश्मीरी पंडितों के मताधिकार समाप्त कर दिए गए।”
शिवसेना ने कहा कि सच्चाई यह है कि कश्मीरी पंडितों को उनके घरों को छोड़ कर जाना पड़ा, जिस वजह से पिछले चुनाव में एक भी हिंदू घाटी से विधायक नहीं निर्वाचित हुआ। यह अशुभ संकेत है।
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