भुवनेश्वर, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। भगवान बलभद्र की प्रतिमा बनाने के लिए ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के सरला देवी मंदिर के निकट एक नीम के पेड़ की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाएगा। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के प्रमुख सुरेश महापात्रा ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
महापात्रा ने कहा कि भगवान बलभद्र की प्रतिमा बनाने के लिए बनजागा दल ने जगतसिंहपुर के तिरतोल प्रखंड के कनकपुर में दारू (लकड़ी) को चिन्हित किया है। लकड़ी झंकाड़ सरला मंदिर के निकट पाई गई।
उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ और देवी सुभद्रा की प्रतिमा बनाने के लिए लकड़ी को चिन्हित कर उसकी घोषणा की जाएगी।
जगतसिंहपुर जिले के कलेक्टर सत्य कुमार मलिक ने कहा कि पुलिस ने उस जगह को चारों ओर से घेर दिया है और वहां वाहनों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई है।
मलिक ने कहा, “भगवान बलभद्र का आशीर्वाद लेने चूंकि वहां बहुत सारे लोग आएंगे, इसलिए स्थिति पर नियंत्रण के लिए प्रशासन को वहां पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मियों को तैनात करने के लिए कहा गया है।”
बनजागा दल में लगभग 130 सदस्य हैं, जो जून में जगन्नाथ मंदिर में आयोजित होने वाले नबकलेबर पर्व के मद्देनजर भगवान जगन्नाथ तथा उनके भाई-बहन की प्रतिमा बनाने के लिए पवित्र लकड़ी की तलाश कर रहे हैं।
परंपरा के मुताबिक, भगवान बलभद्र की प्रतिमा का निर्माण विशेष गुणों वाले नीम के पेड़ की लकड़ी से ही हो सकता है।
उस नीम के पेड़ की छाल सफेद, कुल सात शाखाएं, उसमें हल और मूसल जैसी निशानी हो और दिखने में सांप की तरह हो। साथ ही इसके पास ही एक बेल का पेड़ होना भी जरूरी है।
इससे पहले, भगवान सुदर्शन की लकड़ी भुवनेश्वर के बालाकाती के निकट गादा कंतुनिया में चिन्हित की गई थी।
महापात्रा ने कहा कि भगवान सुदर्शन की प्रतिमा बनाने के लिए लकड़ी काटने का काम शुक्रवार को पूरा होगा और कटे हुए टुकड़ों को पुरी ले जाया जाएगा।
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