अन्तरराष्ट्रीय परिसंवाद कार्यक्रम के मीडिया प्रबंधन में ही असफल रहा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार महाविद्यालय

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अनिल सिंह(भोपाल)– भोपाल की विधानसभा परिसर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद “मूल्य -आधारित जीवन” मप्र शासन के संस्कृति विभाग,शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय,भोपाल का सामूहिक प्रयास से शुरू हुआ.इस कार्यक्रम के उदघाटन सत्र के मुख्य वक्ता ईशा फाउंडेशन के जग्गी वासुदेव महराज थे एवं उन्होंने अपना आरंभिक उद्बोधन दिया.कार्यक्रम का समापन 19 अप्रैल को होगा जिसमें गायत्री शक्ति पीठ के डॉ प्रणव पंड्या मुख्य वक्ता रहेंगे.

मप्र शासन जो की वित्तीय संकट से जूझ रहा है,प्राकृतिक आपदा के इस समय में इतना खर्चीला आयोजन किस उद्देश्य से किया जा रहा है,इससे आम जनता को क्या प्राप्त होगा जिसमें उसका ही धन लग रहा है कोई नहीं बता सका.हाँ पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का फिसड्डीपन पत्रकारिता प्रबंधन में अवश्य सामने आया.

पत्रकारों के लिए उचित स्थान नहीं था 

इतने महंगे आयोजन का सन्देश जनता तक वृहद् स्वरूप में पहुंचाने के लिए जो पत्रकार आये थे उनके लिए निर्दिष्ट स्थान पर अन्य अतिथियों ने आसन ग्रहण कर लिया था.पत्रकारिता का पाठ पढ़ाने वाले विश्वविद्यालय का लचर प्रबंधन इलेक्ट्रोनिक मीडिया के कैमरों के लिए स्थान न होने से ही दृष्टिगोचर हो रहा था.पत्रकार प्रेस-विज्ञप्ति के लिए भटक रहे थे और बिना लिए वहां से आखिर उन्हें जाना पड़ा.

प्रेस से समन्वय के लिए डॉ पवित्र श्रीवास्तव को नियुक्त किया गया था जो माखनलाल संस्थान के ही हैं लेकिन उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए संस्कृति विभाग के अशोक मिश्रा जी के पत्रकारों को भेज दिया.अशोक मिश्रा ने पुनः डॉ पवित्र श्रीवास्तव पर जिम्मेदारी डालते हुए कहा की मीडिया समन्वय की जिम्मेदारी उन्ही की है.

माखनलाल एवं संस्कृति विभाग का इतना बड़ा अमला और मीडिया समन्वय के लिए कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं.वहां सभी अधिकारी कार्यक्रम की मूल भावना के विपरीत अपने संपर्कों को बढाने में व्यस्त दिखे.

माखनलाल के कुलपति ने विश्वविद्यालय के छात्रों से बैठक में बदतमीजी की 

सूत्रों ने बताया की माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय के विवादास्पद कुलपति बृजकिशोर कुठियाला ने इस कार्यक्रम के लिए जो विश्वविद्यालय के छात्र स्वयमसेवक के रूप में कार्य कर रहे थे उनके लिए एक ड्रेस कोड़ तय किया.लड़कों के लिए काला पैंट और सफ़ेद शर्ट अनिवार्य की.उस मीटिंग में जब कुछ छात्रों ने कहा की उनके पास इस तरह की ड्रेस नहीं है तब इन माननीय कुलपति महोदय ने इन युवाओं को झिड़कते हुए कक्ष से बाहर जाने का आदेश सुना दिया.

अब चाहे कार्यक्रम का मूल-भाव कितना ही पवित्र क्यों न हो इस तरह की सोच और उससे उपजा प्रबंधन हमेश कुप्रबंध ही करेगा.माखनलाल में क्या पढ़ाया जा रहा है और उसे किनके निर्देशन में पढ़ाया जा रहा है उनकी कुव्यवस्था इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उजागर हो गयी.

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