भोपाल, 17 अप्रैल (आईएएनएस)। ईशा फाउंडेशन कोयम्बटूर के अध्यक्ष सदगुरु जग्गी वासुदेव महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक चेतना से जुड़े बगैर आर्थिक समृद्घि अर्थहीन है। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ 2016 आध्यात्मिक जीवन के आयामों के प्रति चेतना जाग्रत करने का मार्ग तय करेगा।
मध्यप्रदेश विधानसभा में सिंहस्थ महाकुम्भ 2016 तक चलने वाले वैचारिक महाकुम्भ की श्रृंखला में ‘मूल्य आधारित जीवन’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए शुक्रवार को उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति के मन में शांति न हो तो विश्व शांति संभव नहीं हो सकती। शांति कोई आयातित वस्तु नहीं है, यह मानवीय मन-मस्तिष्क में स्वाभाविक रूप से वास करती है। मनुष्य अपने प्रयासों से स्वयं को शांति के प्रति जाग्रत करता है।
सदगुरु ने कहा कि अब से 25 साल बाद भारत सर्वाधिक मूल्यवान देश के रूप में पहचाना जाएगा। सिर्फ भारत ही दुनिया में उभरी आंतरिक समस्याओं का समाधान दे पाएगा। उन्होंने कहा कि अब लोगों ने अपने से ऊपर देखने के बजाय बाहर देखना शुरू कर दिया है।
वे अपने बारे में सोचने में सक्षम हो गए हैं। भारत अब चेतना से संबंधित विकारों का समाधान करने में सक्षम है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने परिसंवाद को राज्य सरकार का वैचारिक महाकुंभ की परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास बताया। सिंहस्थ घोषणा के माध्यम से वैश्विक समस्याओं के समाधान पर चिंतन-मंथन होगा। सिंहस्थ घोषणा के रूप में सम-सामयिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सरकार का कार्य भौतिक विकास के साथ प्रसन्नता का सूचकांक बढ़ाने के कार्य भी करना है। अंतर्राष्ट्रीय परिसंवाद में देश और विदेश के 2500 से अधिक शोध-पत्र प्राप्त किए गए हैं। सौ से अधिक विद्वानों के व्याख्यान होंगे।
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