मुंबई, 21,अप्रैल (आईएएनएस)। अभिनेत्री-निर्देशक रेवती ने अपनी उम्र के किरदार करने से कभी गुरेज नहीं किया लेकिन उन्हें लगता है कि यहां एक बुजुर्ग महिला पर केंद्रित किरदारों की कमी है। उन्होंने पारंपरिक प्रस्तुतियों के दायरे से बाहर निकलने की जरूरत पर जोर दिया।
रेवती (48) ने आईएएनएस को बताया, “मुझे जिस तरह की फिल्में मिलती हैं, वे थोड़ी उबाऊ हैं क्योंकि मुझे लगता है कि अपनी उम्र के किरदार करना ठीक है, मुझे उससे ऐतराज नहीं है। लेकिन अपने उम्र के किरदार करने का मतलब यह नहीं हमै कि बस एक मां, वकील या चिकित्सक का किरदार करूं। कुछ ही लेखक ऐसे किरदार लिखते हुैं जो 35 या 45 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के अनुकूल हों।”
रेवती ने विभिन्न भूमिकाओं से खुद को हिंदी, तमिल और मलयालम फिल्मोद्योग में स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि वह एक चुनौतीपूर्ण भूमिका की तलाश में हैं।
उन्होंने कहा, “बतौर कलाकार मैं मुझे मिलने वाले किरदारों से थोड़ी ऊब गई हूं। ये मुझे चुनौती नहीं देते। मैं गुणवत्तापरक काम करना चाहती हूं।”
रेवती सिनेमा को मनोरंजन का साधन मानती हैं।
उन्होंने कहा, “मैं अच्छे मनोरंजन की प्रशंसक हूं। सिनेमा मनोरंजन का अच्छा साधन है। कला, पूरी दुनिया की तरह है और मेरे लिए सिनेमा एक कला है।”
रेवती ने फिल्मों का निर्देशन महिलाओं के नजरिए से किया, क्योंकि उनका कहना है कि पुरुषों के नक्शेकदम पर चलना मुश्किल होता है।
इस बीच रेवती ‘मार्गरीटा विद ए स्ट्रॉ’ की सफलता का लुत्फ उठा रही हैं। उन्होंने फिल्म में कल्कि कोच्लिन की मां की भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा, “फिल्म में कोई मुश्किल नहीं आई क्योंकि कल्कि बहुत सरल मन की लड़की हैं और बहुत प्रतिबद्ध हैं। जब लोग प्रतिबद्ध होते हैं, तो आप तुरंत खुद को किरदार से जोड़ लेते हैं। उनके साथ काम करना अच्छा लगा।”
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