बांदा, 23 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड में प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे किसानों की हालत अति गंभीर है। यहां बांदा जिले के एक गांव तेंदुरा में किसानों पर बैंक का सरकारी कर्ज 16 करोड़ रुपये से ज्यादा है। यह जानकारी एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने दी।
उत्तर प्रदेश के हिस्से वाले बुंदेलखंड के किसान पिछले दो दशक से आपदा से जूझ रहे हैं। इस साल भी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की 60 से 80 फीसदी फसल चैपट हो गई है। औसतन 25 फीसदी फसल ही किसनों को नसीब हो पाई है।
गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘कृषि एवं पर्यावरण विकास संस्थान’ के निदेशक सुरेश रैकवार की मानें तो बांदा जिले के तेंदुरा गांव में पांच सौ किसानों पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के अंतर्गत बैंक का सरकारी कर्ज 16 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है।
बकौल रैकवार, “इस गांव के पांच सैकड़ा से अधिक किसानों ने खाद-बीज और बेटियों की शादी के लिए इलाहाबाद बैंक की चौंसड़ शाखा से पांच साल के अंतराल में करीब 16 करोड़ रुपये से अधिक का सरकारी कर्ज ले चुके हैं। हर साल किसान को उम्मीद रहती है कि फसल बेचकर कर्ज की अदायगी हो जाएगी, लेकिन आपदा की मार से ऐसा संभव नहीं है।”
गांव के किसान रामफल दुबे ने बताया कि उसने बेटी शादी 27 अप्रैल को निश्चित की है, फसल बबार्दी के कारण हाल ही में इलाहाबाद बैंक की तेंदुरा शाखा से केसीसी बनवा कर सात लाख रुपये का कर्ज लिया है। कर्ज अदायगी के बारे में करीब सात बीघे खेत बेंच कर ही बैंक का कर्ज अदा कर पाएंगे।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के सगे साढ़ू (रिश्तेदार) और गांव के बड़े किसान रामलगन सिंह ने बताया कि ह्यउनके ऊपर बैंक का सोलह लाख रुपये से ज्यादा कर्ज बाकी है। फसल पैदावार के बारे में जिस खेत में छह से सात कुंतल प्रति बीघा की उपज मिलती थी, उसमें इस साल डेढ़ से दो कुंतल ही अनाज पैदा हुआ है।
कुल मिलाकर इस गांव के किसानों पर चढ़े कर्ज और पैदावार के आंकड़े महज बानगी है, पूरे इलाके के किसानों की कमावेश हालत यही है।
अतर्रा के उपजिला अधिकारी आर.के. श्रीवास्तव का कहना है कि आपदा से नष्ट हुई फसल का मुआवजा प्रभावित किसानों को दिया जा रहा है और कर्ज वसूली पर रोक लगा दी गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि भले ही सरकारी कर्ज वसूली पर रोक लगी हो, लेकिन कर्ज पर चलने वाला ब्याज लगातार अपनी गति से बढ़ता रहेगा और किसान इस बोझ तले दबता जाएगा।
dharmpath.com dharmpath