बेंगलुरू, 5 मई (आईएएनएस)। नेपाल में विनाशकारी भूकंप से भारत के उत्तराखंड में टिहरी बांध पर विवाद एक बार फिर खड़ा हो गया है। इस बांध ने 2006-2007 में काम करना शुरू कर दिया था। महाराष्ट्र के जैतापुर में एक परमाणु संयंत्र की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया है।
बेंगलुरू, 5 मई (आईएएनएस)। नेपाल में विनाशकारी भूकंप से भारत के उत्तराखंड में टिहरी बांध पर विवाद एक बार फिर खड़ा हो गया है। इस बांध ने 2006-2007 में काम करना शुरू कर दिया था। महाराष्ट्र के जैतापुर में एक परमाणु संयंत्र की स्थापना का प्रस्ताव भी रखा गया है।
रोम स्थित ‘इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर प्रोमोटिंग जियोएथिक्स’ (आईएपीजी) ने कहा कि स्वतंत्र भूकंप वैज्ञानिकों की सलाह के बावजूद बांध और इस परमाणु संयंत्र के लिए स्थान के चुनाव को मंजूरी दी गई।
‘आईएपीजी’ ने अपने ताजा रपट ‘जियोएथिक्स, एथिकल चैलेंजिज एंड केस स्टडीज इन अर्थ साइंसेज’ में टिहरी बांध और जैतापुर परमाणु संयंत्र को सबसे विवादास्पद परियोजनाएं बताई हैं। 260.5 मीटर ऊंचा टिहरी बांध देश का सबसे ऊंचा बांध है और 9,900 मेगावाट क्षमता वाला परमाणु संयंत्र विश्व का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र है।
हैदराबाद स्थित भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान के पूर्व निदेशक और इस अध्ययन के अध्ययनकर्ता विनोद गौड़ ने आईएएनएस को बताया कि भारत के इन दो मामलों का अध्ययन इंजीनियरिंग संरचनाओं और मौलिक नैतिक मुद्दों से संबंधित भावी जोखिमों को उजागर करता है।
टिहरी बांध मध्य हिमालय में स्थित है और यह प्रत्येक 100 साल में लगभग दो मीटर भारत में दक्षिण की ओर बढ़ रहा है।
गौड़ के मुताबिक, टिहरी बांध का निर्माण 1972 में किया गया था। इसका निर्माण इस अनुमान पर आधारित था कि इस स्थल पर रिक्टर पैमाने पर अधिकतम 7.2 तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं।
गौड़ ने कहा कि 1980 के मध्य के आसपास भूकंप की तीव्रता का अंदेशा 7.2 से बढ़ाकर 8.5 कर दिया गया, लेकिन टिहरी बांध के सलाहकारों ने बांध के निर्माण संरचना के आधार पर 0.25 जी (जी से यहां तात्पर्य गुरुत्वाकर्षण की वजह से बढ़ोतरी है) को बरकरार रखा।
गौड़ के मुताबिक, बांध की डिजाइन दोबारा तैयार की जानी थी, लेकिन सरकार ने 1996 में स्थापित विशेषज्ञ समिति द्वारा दी गई सलाह को नजरअंदाज कर इस बांध के निर्माण को हरी झंडी दे दी।
इस पांच सदस्यीय समिति के चार सदस्यों ने रिक्टर पैमाने पर आठ तीव्रता तक के भूकंप की प्रतिक्रिया को जानने के लिए बांध का एक 3डी प्रारूप तैयार करने की सिफारिश की थी।
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