भोपाल, 8 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार ने भले ही मंडी श्रमिक व्यय की प्रतिपूर्ति को अमान्य कर दिया हो, लेकिन मध्य प्रदेश के किसानों पर यह बोझ नहीं पड़ेगा। राज्य सरकार ने मंडी श्रमिक व्यय की पूर्ति उपार्जन (खरीद) करने वाली एजेंसी द्वारा किए जाने का फैसला लिया है।
राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि रबी विपणन वर्ष 2015-16 में उपार्जित होने वाले गेहूं पर किसान (विक्रेता) द्वारा वहन किए जाने वाले मंडी श्रमिक व्यय की प्रतिपूर्ति केन्द्र शासन द्वारा अमान्य किए जाने पर यह व्यय कृषकों से नहीं काटा जाए।
खाद्य-नागरिक आपूर्ति विभाग के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि चार रुपये प्रति क्विंटल औसत के हिसाब से उपार्जन एजेंसी द्वारा भुगतान किया जाए तथा राज्य की उपार्जन एजेंसी को इसकी प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाएगी।
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