..तो वापस बच्चा बनना चाहूंगा : मोदी

दंतेवाड़ा, 9 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यहां बच्चों की मुलाकात के दौरान उनसे कई रोचक सवाल पूछे गए, और प्रधानमंत्री ने उनका अपने अंदाज में जवाब दिया। मोदी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जीवन का सबसे ज्यादा आनंद बच्चा बने रहने का है। बड़े हो जाते हैं तब हमें उसका महत्व पता लगता है। ईश्वर मुझसे पूछे कि क्या चाहते हो, तो मैं कहूंगा कि वापस बच्चा बनना चाहूंगा।

मोदी यहां गीदम के जावंगा ऑडिटोरियम में जनजातीय बच्चों से मुखातिब हो रहे थे।

बच्चों ने मोदी से कुछ इस तरह के सवाल पूछे-

सवाल : कोई घटना बताइ, जिससे आपको प्रेरणा मिली हो?

मोदी का जवाब : बहुत बार खुद से ज्यादा औरों की घटनाओं से प्रेरणा मिलती है। लेकिन उसके लिए हमें खुद को उस तरह बनाना होगा कि दूसरों से सीख सकें। आप लोग एक पोलीएना नामक किताब पढ़िएगा, 70-80 पन्नों की इस किताब में एक बच्ची का किरदार है। उसके मन में एक ही विचार रहता है कि हर चीज में से अच्छी बात कैसे निकाली जा सकती है।

सवाल : दिन में 18 घंटे काम कैसे करते हैं?

मोदी का जवाब : मैं कभी नहीं गिनता कि कितने घंटे काम किया। जब हम गिनना शुरू कर देते हैं तो हम थक जाते हैं कि अरे इतना समय काम कर लिया। बच्चों आपको मिला होमवर्क जैसे ही पूरा होता है वैसे ही आपकी थकान उतर जाती है। काम की थकान कभी नहीं होती, काम न करने की थकान होती है। जितना ज्यादा काम करते हैं, उतना ही ज्यादा आनंद मिलता है।

सवाल : आप जीवन की सबसे बड़ी सफलता किसे मानते हैं और उसका श्रेय किसे देंगे?

मोदी का जवाब : जीवन को सफलता और विफलता के तराजू से नहीं तौलना चाहिए। हमें एक ध्येय लेकर चलना चाहिए। कभी रुकावट और कठिनाइयां आएं तो ध्येय के आगे यह बौनी हो जाती है। इसके साथ ही विफलता से सीखना चाहिए। ज्यादातर लोग इसलिए सफल नहीं होते क्योंकि वे विफलता से नहीं सीखते। मेरा जीवन ऐसा है जिसमें ज्यादातर विफलताएं ही मिली हैं। कोशिश करता हूं कि विफलता से ज्यादा से ज्यादा सीखने का प्रयास करूं।

सवाल : यदि आप राजनीति में नहीं होते तो क्या होते?

मोदी का जवाब : जीवन का सबसे ज्यादा आनंद बच्चा बने रहने का है। बड़े हो जाते हैं तब हमें उसका महत्व पता लगता है। ईश्वर मुझसे पूछे कि क्या चाहते हो, तो मैं वापस बच्चा बनना चाहूंगा।

सवाल : आपकी सफलता का राज बताना चाहेंगे?

मोदी का जवाब : जीवन में किसी भी क्षेत्र में सफल होना है तो हमें पता होना चाहिए कि कहा और किस रास्ते जाना है। हमें पता होना चाहिए कि कैसे जाना है, कब तक जाना है। अगर हमारी ऐसी सोच होगी तो रुकावटों के बाद भी संकल्प ²ढ़ रहेगा। लक्ष्य से भटकने वालों को कभी सफलता नहीं मिलती। आज एक इच्छा तो कल कोई दूसरी इच्छा। ऐसा न हो तो सफलता हमारी कदम चूमती चली आएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कुछ बनना है, तो बनने के सपने कम देखो और करने के सपने ज्यादा देखो।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मोदी दिनभर के छत्तीसगढ़ दौरे पर हैं।

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