आकांक्षा कुमारी
आकांक्षा कुमारी
नई दिल्ली, 9 नई (आईएएनएस)। दिल्ली मेट्रो के चालक पांच दिनों से बांह पर काला रिबन लगाकर मेट्रो चला रहे हैं। वे वेतन-भत्ते में वृद्धि और नौकरी की सुरक्षा की गारंटी चाहते हैं। वे मंगलवार से अनशन भी करेंगे। मेट्रो स्टाफ काउंसिल ने दिल्ली मेट्रो रेल कापोर्रेशन (डीएमआरसी) पर तानाशाही व शोषण का आरोप लगाया है।
दिल्ली मेट्रो कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए गठित स्टाफ काउंसिल के सचिव अनिल महतो ने शनिवार को आईएएनएस से कहा, “हम संचालन (ऑपरेशन) तथा रखरखाव (मेनटेनेंस), दोनों वर्ग के कर्मचारियों के लिए वेतन और भत्ते में समान नियमों का पालन किए जाने की मांग कर रहे हैं, और अगर हमारी बात नहीं सुनी गई तो हम मंगलवार से भूख हड़ताल पर जाएंगे।”
उन्होंने कहा, “मेट्रो के अधिशासी और गैर अधिशासी कर्मचारियों के वेतन और भत्ते में भारी अंतर है। दिल्ली मेट्रो में छठा वेतन आयोग सही तरीके से लागू नहीं हो पाया है। अधिशासी कर्मचारियों का जहां आवास भत्ता 25,000 रुपये हैं, वहीं गैर अधिशासी कर्मचारियों को दिल्ली जैसे महंगे शहर में 3,000 आवास भत्ता मिलता है।”
महतो ने कहा, “अधिशासी कर्मचारियों का परिवहन भत्ता 12,000 रुपये है, जबकि गैर अधिशासी कर्मचारियों को काम के दौरान मेट्रो में एसजी4 कार्ड दिया जाता है, जिसका इस्तेमाल कर्मचारी ड्यूटी पर आने के बाद करते हैं। ड्यूटी से बाहर इसका इस्तेमाल करने पर पैनल्टी देनी होती है।”
उन्होंने कहा, “डीएमआरसी में तानाशाही है, कर्मचारियों का शोषण किया जा रहा है। वह अपने कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।”
महतो ने बताया, “पिछले साल येलो लाइन के सुल्तानपुर से घिटोरनी के बीच एक चलती मेट्रो का दरवाजा खुला रह गया था। उस मेट्रो के चालक राम नरेश को दो महीने पहले नौकरी से हटा दिया गया, लेकिन इस तथ्य पर ध्यान नहीं दिया गया कि घटना से पहले छह महीने की मेडिकल छुट्टी से लौटा था और बिना मेडिकल नियमों का पालन किए उसे काम पर लगा दिया गया था।”
10 सदस्यीय निर्वाचित स्टाफ काउंसिल का गठन पिछले साल जुलाई में हुआ था, जो डीएमआरसी के कर्मचारियों की मांगों को प्रबंधन के सामने रखता है।
स्टाफ काउंसिल के सचिव तथा मेट्रो चालकों का आरोप है कि इस संस्था का गठन महज दिखावे के लिए किया गया और न इसे उचित अधिकार दिए गए और न ही इसकी बात सुनी जाती है।
महतो ने कहा, “काउंसिल के सदस्यों के पास बैठने की जगह नहीं है, इसे रेस कोर्स में कार्यालय देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन यह भी पूरा नहीं हुआ। हम मेट्रो भवन में अपने दफ्तर की मांग कर रहे हैं।”
उन्होंने चालकों के स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठाया और कहा कि चालक प्लेटफार्म पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां गर्म हवा तथा लू से उनका स्वास्थ्य खराब हो रहा है, लेकिन मेट्रो प्रबंधन का इस पर ध्यान इस ओर नहीं है।
महतो का कहना है कि उन्होंने इन बातों पर ध्यान दिलाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, उप मुख्यमंत्री कार्यालय, दिल्ली पुलिस प्रमुख, शहरी विकास मंत्रालय को पत्र भेजा है।
महतो खुद मेट्रो के संचालन विभाग के कर्मचारी हैं और उन्हें यह डर है कि इस प्रदर्शन से उनकी नौकरी को खतरा हो सकता है।
उन्होंने बताया कि मेट्रो चालक पांच मई से काला रिबन लगा कर मेट्रो चला रहे हैं और सात मई से मेट्रो का एक चक्र पूरा करने के बाद रेस्ट रूम में आराम करने की जगह प्लेटफॉर्म पर ही शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन दिल्ली मेट्रो के उन सभी स्टेशनों पर हो रहा है, जहां मेट्रो के रेस्ट रूप हैं।
नोएडा सिटी सेंटर/वैशाली लाइन के यमुना बैंक स्टेशन पर प्रदर्शन कर रहे कुछ चालकों ने बताया कि डीएमआरसी के गैर अधिशासी कर्मचारियों के साथ वेतन, भत्ता, काम के घंटे को लेकर काफी शोषण हो रहा है।
यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन पर एक मेट्रो चालक ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर आईएएनएस को बताया, “हम मेट्रो चालक यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, पिछले पांच दिनों से हमने आराम नहीं किया है, जिसका निश्चित रूप से मेट्रो के संचालन पर प्रभाव पड़ेगा, लेकिन प्रबंधन का ध्यान इस तरफ नहीं जा रहा है।”
उल्लेखनीय है कि मेट्रो के संचालन तथा रखरखाव विभाग के करीब 6,000 कर्मचारी वेतन और भत्ते में वृद्धि, की समाप्ति, नौकरी की सुरक्षा को सुनिश्चित किए जाने और स्टाफ काउंसिल को उचित अधिकार देने तथा दफ्तर मुहैया कराए जाने की मांग को लेकर पांच मई से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं।
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