नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। केंद्र सरकार सोमवार को राज्यसभा में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पेश करेगी, जिसका लक्ष्य भारत में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में सुधार करना है। वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व में कुछ विपक्षी पार्टियां से प्रवर समिति को भेजने की मांग कर रही हैं।
बजट सत्र के समापन को सिर्फ तीन दिन रह गए हैं। विधेयक को पिछले सप्ताह लोकसभा में मौजूद रहे सदस्यों की संख्या के दो-तिहाई बहुमत से और मतदान के जरिए पारित कर दिया गया, जैसा कि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक था।
राज्यसभा में यदि यह विधेयक पारित हो जाता है, तो इसे देश के कुल 29 राज्यों में से कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं में पारित कराना होगा। उसके बाद राष्ट्रपति इस पर अपनी मुहर लगाएंगे और फिर यह प्रभावी हो जाएगा।
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को मुंबई में कहा था कि सीएसटी के लागू होने के बाद आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे राज्यों का राजस्व बढ़ेगा।
जेटली ने कहा था, “पूरा देश एक बाजार बन जाएगा। यह भारत का आर्थिक एकीकरण होगा।”
जीएसटी का मुख्य उद्देश्य कर व्यवस्था को एकीकृत करना है, जिसमें केंद्र तथा राज्य सरकारों द्वारा लिए जाने अप्रत्यक्ष करों जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर, मूल्यवर्धित कर, बिक्री कर और ऑक्ट्रॉय को एक किया जाएगा।
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