किसानों को कहना है कि कोर्ट में वकील उनका पक्ष सही तरीके से नहीं रख पाए। इसलिए वे सुप्रीम कोर्ट मे रिव्यू रिट दायर करेंगे।
अधिग्रहीत भूमि वापस किए जाने को लेकर किसानों ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। किसानों का कहना था कि उनसे औद्योगिक इस्तेमाल के नाम पर आपातकालीन क्लॉज लगाकर जमीन ली गई, लेकिन बाद में जमीन बिल्डरों को सौंप दी गई। अब उन्हें उनकी जमीन वापस मिलनी चाहिए।
इस मामले में वर्ष 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को गलत माना था, लेकिन इलाके में हो चुके निर्माण को देखते हुए किसानों को जमीन लौटाने का आदेश देने से मना कर दिया था, जिसके खिलाफ किसान सुप्रीम कोर्ट में आए थे।
भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपना फैसला सुनाते हुए किसानों को जमीन वापस ना मिलने की बात कही। हालांकि बढ़ा हुआ मुआवजा 10 प्रतिशत विकसित जमीन भी देने की बात कही। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज नाखुश 64 गांवों के किसानों ने महापंचायत कर तय किया है कि एक जून को दिल्ली तक पदयात्रा निकालने का फैसला लिया गया है। पदयात्रा को किसान भूमि अधिकार नाम दिया गया है।
किसान नेता मनवीर भाटी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में किसानों की अनदेखी की है। फैसले से किसान चुप नहीं बैठेंगे। एक जून को किसान नोएडा प्राधिकरण की चेयरमैन रमा रमण के घर से पदयात्रा शुरू करेंगे और सैकड़ों किसान की यह पदयात्रा दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन तक जाएंगी। जहां वहां राष्ट्रपति के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा जाएगा।
भाटी ने बताया कि पदयात्रा को सफल बनाने के लिए 24 मई को जन जागरण बाइक रैली निकाली जाएगी। रैली जेवर से शुरू होगी। दादरी, जारचा, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दनकौर, रबूपुरा समेत पूरे जिले में निकाली जाएगी।
उन्होंने कहा कि पदयात्रा के बाद अगर प्राधिकरण और सरकार किसानों की नहीं सुनता है तो किसान सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। उससे भी राहत नहीं मिली तो फिर पांच सदस्यीय जजों की बेंच में अपील की जाएगी।
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