इंदौर, 21 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में विभिन्न बैंकों से गलत दस्तावेजों के सहारे ढाई हजार करोड़ रुपये का कर्ज लेने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए गए जूम डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड के सचिव और पूर्व निदेशक शरद काबरा को 10 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है। उनके खिलाफ ढाई साल पहले ईडी ने प्रकरण दर्ज किया गया था।
सरकारी वकील रवींद्र सिंह ने संवाददाताओं को गुरुवार को बताया कि काबरा को बुधवार को ईडी ने गिरफ्तार किया था, वह 135 कंपनियों से संबद्घ है, उस पर विभिन्न बैंकों से 2650 करोड़ रुपये का फर्जी दस्तावेजों के सहारे कर्ज लेने का आरोप है।
सिंह ने बताया कि काबरा को गुरुवार को जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने काबरा को ईडी को 10 दिन की रिमांड पर सौंप दिया। मामले की अगली सुनवाई एक जून को होगी।
ज्ञात हो कि काबरा को ईडी ने बुधवार को मुंबई से पूछताछ के लिए इंदौर बुलाया था। देर रात तक चली पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। काबरा के वकील अनिल शर्मा ने गुरुवार को संवाददाताओं से चर्चा के दौरान उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की।
सूत्रों के अनुसार काबरा का विभिन्न कंपनियों से जुड़ाव रहा है। उन्होंने पांच कंपनियों की 30 करोड़ रुपये की संपत्ति को गलत कागजातों के सहारे 300 करोड़ रुपये दर्शाया। इस आधार पर काबरा ने 18 से ज्यादा बैंकों से फर्जी कागजात के जरिए विदेश की विभिन्न परियोजनाओं के लिए दो हजार 650 करोड़ का कर्ज ले लिया। इस मामले में ईडी ने ढाई वर्ष पूर्व काबरा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया था और उनकी बुधवार की रात को गिरफ्तारी हो गई। ईडी ने काबरा पर प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट की धारा 45 के तहत प्रकरण दर्ज किया।
राज्य के बड़े कारोबारी व व्यापारिक संगठनों से नाता रखने वाले राजेंद्र कोठारी का कहना है कि ढाई हजार करोड़ का कर्ज बगैर किसी संपत्ति को परखे कैसे दे दिया गया, यह सवाल उठता है। यह सब बिना बैंक अफसरों की मिलीभगत के संभव नहीं जान पड़ता।
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