उप्र : जगेंद्र हत्याकांड की सीबीआई जांच की मांग

इन दोनों ने शाहजहांपुर में घटनास्थल पर जाकर आसपास के लोगों से बात की और यह निष्कर्ष निकाला कि पत्रकार के बदन में आग पुलिस के अंदर घुसने के बाद लगी।

लोगों ने उन्हें यह भी बताया कि जिस मुकदमे में जगेंद्र के खिलाफ पुलिस दबिश में गई थी, वह पूरी तरह झूठा था। इसके बाद इन दोनों ने शाहजहांपुर की जिलाधिकारी शुभ्रा सक्सेना से एक बार खुटार जाकर परिजनों से मिल लेने का निवेदन किया तो उन्होंने कहा कि एसडीएम मौके पर गए थे, उनका जाना ही काफी है।

शुभ्रा ने कहा, “यह विवादित मामला है, इसमें दो तरह की बातें कही जा रही हैं और यदि मौके पर गई तो मैं भी विवाद में फंस जाऊंगी।” मुआवजे के बारे में भी उन्होंने परिवार को कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं दिया।

वहीं नूतन ठाकुर ने कहा कि डीएम का बयान दुर्भाग्यपूर्ण और प्रशासनिक निर्ममता का सबूत है।

गौरतलब है कि शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह के घर एक जून को दोपहर करीब तीन बजे कोतवाली के निवर्तमान प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय, दो दारोगा और चार सिपाहियों ने दबिश दी थी। बंद कमरे में क्या हुआ, कोई जान न पाया, लेकिन पुलिस बल के जाते ही जगेंद्र गंभीर रूप से झुलसे हुए पाए गए।

जगेंद्र के शरीर का 65 फीसद हिस्सा झुलस गया था। परिवार के लोग उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले गए, जहां मजिस्ट्रेटी बयान (अंतिम) में जगेंद्र ने कहा था, “राज्यमंत्री राममूर्ति वर्मा के इशारे पर इंस्पेक्टर श्रीप्रकाश राय ने उन पर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा फूंकने का प्रयास किया।”

लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती जगेंद्र की कुछ घंटों बाद मौत हो गई थी।

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