नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। दिल्ली में 25 सरकारी अस्पतालों के 20,000 से अधिक रेजीडेंट डॉक्टर अस्पताल में सुरक्षा और जीवनरक्षक दवाएं बढ़ाने की मांग को लेकर सोमवार को हड़ताल पर चले गए।
फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्र्ट्स एसोसिएशन (फोर्डा) के आह्वान पर डॉक्टरों ने काम करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी न होंगी, वे काम पर नहीं लौटेंगे।
फोर्डा दिल्ली के 25 सरकारी अस्पतालों में कार्यरत चिकित्सकों का संगठन है।
डॉक्टर फरवरी में भी हड़ताल पर चले गए थे। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने उन्हें कार्यस्थल पर बेहतर माहौल मुहैया कराने का आश्वासन दिया था।
फोर्डा के अध्यक्ष पंकज सोलंकी ने आईएएनएस को बताया, “हम तब तक हड़ताल खत्म नहीं करने वाले, जब तक हमारी सारी मांगें नहीं मान ली जातीं। हमें हर बार आश्वासन दिया गया और हड़ताल खत्म करने के लिए कहा गया। हमने वैसा किया, मगर धोखा मिला। इस बार हम ऐसा नहीं होने देंगे।”
उन्होंने कहा कि संकाय सदस्य तथा वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों की देखरेख कर रहे हैं और आपातकालीन सेवाएं चल रही हैं।
फोर्डा ने फरवरी में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से शहर के सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा संबंधी दिक्कतों पर संज्ञान लेने का आग्रह किया था।
गुरु तेग बहादुर और सफदरजंग अस्पताल में तीमारदारों के साथ दुष्कर्म की चार घटनाएं सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखा गया था।
हड़ताल पर गए डॉक्टरों ने कहा कि अस्पताल परिसर में खुलेआम जेबकतरे और चोर घूमते रहते हैं। वे मरीजों के पैसे और सामान उड़ा लेते हैं।
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