उप्र : मनरेगा में फर्जी भुगतान, नपेंगे कई अफसर

मनरेगा में घोटाले की शिकायतें आने पर जिलाधिकारी चंद्रपाल सिंह ने राजस्व अधिकारी विमल कुमार अग्रवाल और जिला विकास अधिकारी मंजू श्रीवास्तव की दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि दो खंड विकास अधिकारी (बीडीओ), एक सहायक लेखाकार और दो संविदा कर्मी ने मिलकर एक फर्म को 2 लाख 80 हजार 736 रुपये का फर्जी भुगतान किया।

जिलाधिकारी ने जांच में दोषी पाए गए खंड विकास अधिकारी राजकुमार एवं सहायक लेखाकार रामदत्त शर्मा के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए आयुक्त व प्रमुख सचिव (ग्राम विकास) को पत्र भेजा है।

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, संविदा कर्मी संतोष कुमार (एपीओ) व सतीश चंद्र (कम्प्यूटर ऑपरेटर) की सेवा खत्म करने की कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा मनरेगा के उपायुक्त को निर्देश दिया गया है कि वह अलीगढ़ के रामघाट रोड स्थित जनरल सर्विस के स्वामी नरोत्तम तथा चारों अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएं।

जांच में पाया गया कि एक तत्कालीन बीडीओ ने अपना ईमान बेचकर मात्र 7 हजार रुपये का भुगतान किया। उनसे एक सप्ताह के अंदर स्पष्टीकरण का जवाब मांगा गया है।

मुख्य विकास अधिकारी अनुराग पटेल ने बताया कि करहल ब्लॉक के बारे में खबरें लगातार प्रकाशित हो रही थीं कि मनरेगा में 40-50 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। इसकी जांच 2 सदस्यीय टीम ने की। टीम की रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार ने बीडीओ और सहायक लेखाकार के डोगल का अनुचित इस्तेमाल कर अपने भाई की फर्म के नाम 27 लाख 80 हजार 736 का फर्जी भुगतान कराया।

फर्जी भुगतान मार्च, 2014 से दिसंबर 2014 के बीच किए गए। इसमें से 7 हजार रुपये का भुगतान तत्कालीन बीडीओ दुर्गा प्रसाद के कार्यकाल में किया गया, 27 लाख 73 हजार 736 रुपये का भुगतान बीडीओ राजकुमार व सहायक लेखाकार रामदत्त शर्मा के कार्यकाल में किए गए।

जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट प्राप्त होते ही सभी दोषियांे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

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