नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। देश के 920 औद्योगिक इकाइयों में 24 घंटे काम करने वाला प्रदूषण निगरानी उपकरण लगाया गया है और अन्य 400 इकाइयों ने शून्य तरल विजर्सन (जेडएलडी) प्रणाली अपना लिया है। यह बात मंगलवार को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कही।
मंत्री ने यहां संवाददाताओं से कहा कि मंत्रालय ने 2,800 प्रदूषणकारी इकाइयों को निर्देश दिया था और करीब 50 फीसदी इकाइयां अनुपालन की तरफ बढ़ी हैं।
जावड़ेकर ने कहा, “प्रदूषणकारी इकाइयों को उत्सर्जन निकास द्वारा पर 24 घंटे काम करने वाला निगरानी उपकरण लगाने का आदेश दिया गया था। 920 से अधिक इकाइयों ने निगरानी उपकरण लगा लिया है और 400 अन्य इकाइयां जेडएलडी की तरफ बढ़ी हैं।”
मंत्री ने कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने अनुपालन के ऑनलाइन आंकड़े हासिल करने शुरू कर दिए हैं।
जावड़ेकर ने कहा कि मंत्रालय प्रदूषण निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के लिए दंड की व्यवस्था लागू करने पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि गंगा सफाई सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि नदी के आसपास 630 अत्यधिक प्रदूषणकारी औद्योगिक इकाइयां लगी हुई हैं, जिसमें से 440 चमड़ा शोधन संयंत्र हैं।
मंत्री ने कहा, “शेष 190 इकाइयों में से 80 ने उपकरण लगा लिए हैं और 30 ने उपकरण की खरीद के आदेश दे दिए हैं। इस तरह से 190 में से 110 इकाइयां अनुपालन की तरफ बढ़ चुकी हैं।”
मंत्री ने बताया कि अनुपालन नहीं करने वाली 64 प्रदूषणकारी इकाइयों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया गया है।
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