मुंबई, 7 जुलाई (आईएएनएस)। मुंबई में 11 जुलाई, 2006 को उपनगरीय रेलगाड़ियों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों में घायल पराग सावंत की मंगलवार सुबह मौत हो गई। वह पिछले नौ वर्षो से कोमा में थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
भायंदर निवासी पराग (37) को सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। वह मस्तिष्काघात से जूझ रहे थे।
पराग के परिवार में उनकी पत्नी प्रीति और आठ वर्षीय बेटी प्रणीति हैं। सावंत ने अपनी एक मात्र औलाद को कभी नहीं देखा, क्योंकि उसका जन्म उस समय हुआ था, जब पराग कोमा में थे। प्रीति को बाद में रेलवे में नौकरी दी गई।
अस्पताल में लंबा समय गुजारने के कारण पराग अपनी जीजीविशा के लिए लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो गए थे। वह 2008 में संक्षिप्त समय के लिए कोमा से बाहर आ गए थे।
मुंबई की उपनगरीय रेलगाड़ियों में 7/11 को सिर्फ 11 मिनट के अंतराल पर सात बम विस्फोट हुए थे। इस हमले में 209 यात्रियों की मौत हो गई थी और 700 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
घटना के समय सावंत की उम्र 27 वर्ष थी और वह चर्चगेट से विरार जाने वाली रेलगाड़ी में सवार थे। वह घर लौट रहे थे।
उन्हें मीरा रोड स्थित भक्तिवेदांत अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद उन्हें दक्षिण मुंबई के पी.डी.हिंदुजा अस्पताल में भेज दिया गया।
सावंत का इलाज करने वाले कंसल्टैंट न्यूरोसर्जन डॉ. बी.के.मिश्रा ने कहा कि वह लगभग दो वर्षो तक कोमा में रहे थे।
मिश्रा के मुताबिक, “उनकी हालत धीरे-धीरे सुधर कर अर्धचेतन अवस्था तक पहुंच गई थी, जिसमें वह सामान्य निर्देशों को समझते थे। उनके मस्तिष्क का कई बार ऑपरेशन किया गया।”
एक नर्स ने मंगलवार तड़के सावंत की जांच की और उनकी हालत स्थिर पाई थी। तड़के छह बजे उनके रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिर गया था और उन्हें सामान्य श्वास के लिए ऑक्सीजन दिया जा रहा था।
मिश्रा के मुताबिक, “उन्हें दिल का दौरा पड़ा था और तड़के 6.54 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।”
पूर्वोत्तर मुंबई से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद किरीट सोमैया ने सावंत के निधन पर शोक व्यक्त किया और कहा, “मैं यह खबर सुनकर उदास हूं। पिछले सप्ताह ही मैंने अगले शनिवार को 7/11 की नौवीं बरसी पर पराग से अस्पताल में मिलने को लेकर उनके परिवार से चर्चा की थी। पराग और उसके परिवार ने इस त्रासदी का बहादुरी से सामना किया है।”
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