नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने गुरुवार को कहा कि अगर सरकार इस्लामाबाद के साथ वार्ता को लेकर गंभीर है, तो नरेंद्र मोदी सरकार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पाकिस्तान विरोधी आक्रामक सुर में सुर मिलाना बंद करना चाहिए।
माकपा ने अपनी पत्रिका पीपुल्स डेमोक्रेसी में एक संपादकीय लेख में कहा, “इसे स्वीकार करते हुए कि पाकिस्तान में ऐसे कुछ तत्व हैं, जो भारत के साथ संबंधों में सुधार के प्रयास में बाधा पहुंचा सकते हैं, मोदी को भाजपा के पाकिस्तान विरोधी सुर में सुर नहीं मिलाना चाहिए।”
संपादकीय के मुताबिक, “एक सार्थक वार्ता जितना कठिन पाकिस्तान के लिए है, वहीं प्रक्रिया को आगे ले जाने में भाजपा-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की मानसिकता भी एक बाधा है।”
माकपा के मुखपत्र में कहा गया है कि कश्मीर तथा अन्य मुद्दों पर पहले की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग)-1 सरकार द्वारा पूर्व में किए गए द्विपक्षीय वार्ता की राह अपनाने की जरूरत है।
लेख में कहा गया है, “इसके साथ ही भारत को निशाना बनाने वाले अतिवादी-आतंकवादी समूहों पर लगाम के लिए ठोस कदम उठाने के लिए पाकिस्तान को नए सिरे से प्रयास करना होगा।”
संपादकीय के मुताबिक, जहां तक पाकिस्तान की बात है, तो नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार अपने आक्रामक रुख तथा विरोधाभासी वास्तविकताओं के मध्य उलझकर रह गई है।
लेख में कहा गया, “यह मुद्दा रूस के उफा में 10 जुलाई को भारत तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान तथा बाद के कार्यक्रमों से उभरा है।”
उफा की बैठक अप्रत्याशित, लेकिन सकारात्मक रही।
लेख के मुताबिक, “पाकिस्तान के खिलाफ हालांकि भाजपा के आक्रामक रुख में कोई बदलाव नहीं आया।”
संप्रग सरकार पर पाकिस्तान के साथ वार्ता को लेकर देशहित को बार-बार गिरवी रखने का आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार खुद को पाकिस्तान के साथ वार्ता को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण से बाहर निकलने में नाकाम पा रही है।
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