भोपाल, 9 सितम्बर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार से शुरू हो रहे विश्व हिंदी सम्मेलन में हिस्सा लेने अमेरिका से आए अशोक ओझा का कहना है कि अमेरिका में हिंदी को विदेशी भाषा की मान्यता है और धीरे-धीरे हिंदी का दायरा भी बढ़ रहा है।
ओझा ने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा, “वह अमेरिका के न्यूजर्सी में युवा हिंदी संस्थान और हिंदी संगम नामक दो संस्थाएं चलाते हैं। इन संस्थाओं का मकसद बच्चों से लेकर युवाओं तक को हिंदी पढ़ाना है। एक तरफ जहां बच्चों को हिंदी पढ़ाई जाती है, वहीं शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा, “हिंदी को भारतीय परिवेश से जोड़ कर पढ़ाया जाता है, तभी बच्चों में उसके प्रति लगाव बढ़ता है। मसलन महात्मा गांधी को अगर मार्टिन लूथर किंग से जोड़कर पढ़ाया जाता है तो वहां बच्चे उसे आसानी से समझ जाते हैं और उन्हें पता चलता है कि उनके पूर्वज कैसे थे।”
भारत में हिंदी की स्थिति के सवाल पर उन्होंने कहा, “यहां हिंदी की उपेक्षा की जाती है। अंग्रेजी का ज्यादा इस्तेमाल होता है। अंग्रेजी का वर्चस्व बना हुआ है, जो चिंताजनक है। आजादी के लगभग 70 वर्ष बाद हिंदी को वह स्थान नहीं मिल पाया है, जिसकी वह हकदार है।”
ओझा ने आगे कहा, “आज जरूरत यह बताने की है कि हिंदी को कैसे पढ़ा और पढ़ाया जाए। सामग्री में व्याकरण पर जोर होने के बजाय उसे रोचक होना चाहिए। इस दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।”
विश्व हिंदी सम्मेलन को लेकर ओझा ने कहा कि सम्मेलन में जिन विषयों पर चर्चा हो और जो निष्कर्ष निकले, उन पर अमल आवश्यक है।
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