जम्मू, 10 सितंबर (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय की ओर से राज्य में गोमांस बिक्री पर प्रतिबंध के आदेश की खबर गुरुवार को सुर्खियों में है। कुछ लोगों का हालांकि यह कहना है कि यह डेढ़ सौ साल पुराने कानून की पुनरावृत्ति भर है।
जम्मू एवं कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त होने के कारण राज्य में दो दंड संहिताओं का पालन होता है, जिनमें से एक है भारतीय दंड संहिता एवं दूसरी है रणबीर दंड संहिता (आरपीसी)। कुछ धाराओं को छोड़कर दोनों संहिताएं लगभग समान हैं।
आरपीसी की धारा 298ए के मुताबिक, गाय, बैल या भैंस की इरादतन हत्या या वध दंडनीय और गैर जमानती अपराध है, जिसके तहत 10 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।
धारा 298बी के मुताबिक, गाय, बैल या भैंस का मांस खरीदना दंडनीय और गैर जमानती अपराध है, जिसके तहत एक साल की जेल और जुर्माना हो सकता है।
आरपीसी को 1862 में तत्कालीन डोगरा महाराज ने राज्य में लागू किया था, जबकि उसी समय आईपीसी भी देश में लागू हुआ था।
न्यायमूर्ति धीरज सिंह ठाकुर एवं न्यायमूर्ति जनकराज कोटवाल की जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने बुधवार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिए कि सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) एवं स्टेशन हाउस ऑफिसरों (एसएचओ) को आदेश लागू करवाने के निर्देश दिए जाएं।
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