भोपाल, 11 सितम्बर (आईएएनएस)। जर्मनी में हिंदी का पाठ पढ़ा रहीं हिंदी की विद्वान सुशीला शर्मा का मानना है कि हिंदी में बोलचाल में उन भाषाओं के शब्दों का समावेश कर लेना चाहिए, जो आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं, फिर चाहे वे अंग्रेजी भाषा के ही क्यों न हों।
भोपाल, 11 सितम्बर (आईएएनएस)। जर्मनी में हिंदी का पाठ पढ़ा रहीं हिंदी की विद्वान सुशीला शर्मा का मानना है कि हिंदी में बोलचाल में उन भाषाओं के शब्दों का समावेश कर लेना चाहिए, जो आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गए हैं, फिर चाहे वे अंग्रेजी भाषा के ही क्यों न हों।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रहे 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचीं सुशीला शर्मा ने आईएएनएस से कहा कि सिर्फ आयोजनों से हिंदी का विकास और विस्तार नहीं होगा। इसके लिए हमारा नजरिया हिंदी के विकास एवं विस्तार पर होना जरूरी है। उन्होंने विदेशियों के नाम पर आयोजन स्थल पर सभागार बनाए जाने पर आपत्ति जताई और कहा कि क्या हमारे देश में हिंदी के विद्वानों की कमी है?
सुशीला वर्षो से जर्मनी में रहकर दूतावास और विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों को हिंदी सिखा रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं जब कॉलेज में पढ़ती थी, तो लगता था कि अंग्रेजी के शब्दों का प्रयोग नहीं करना है। 15 साल तक पढ़ाने के बाद मेरा अनुभव है कि जो शब्द जिसकी समझ में आ जाए, उसका उपयोग कर लेना चाहिए। आज रेडियो, रेल, टिकट, टेलीफोन, टेलीविजन आदि के लिए हिंदी में कई कठिन और अप्रचलित शब्दों का प्रयोग हो रहा है, लिहाजा जो शब्द प्रचलन में हैं, उन्हें हिंदी में सामहित कर लेना चाहिए।”
उन्होंने हिंदी के स्थान पर प्रचलन में आ चुके अंग्रेजी शब्दों का महत्व स्वीकारा और बताया कि उनकी एक छात्रा बनारस से दिल्ली पहुंची और एक रिक्शे वाले से विश्वविद्यालय चलने के लिए कहा, जिस पर उसका जवाब था कि ऐसी जगह यहां नहीं है। छात्रा के ‘यूनिवर्सिटी’ कहने पर रिक्शे वाले का जवाब था, ‘ऐसा कहिए न।’ इससे साफ है कि कम शिक्षित वर्ग की जुबान पर भी जो शब्द चढ़ चुके हैं, उन्हें हिंदी में समाहित कर लेना चाहिए।
सुशीला ने विश्व हिंदी सम्मेलन के आयोजन की अल्प व्यवस्थाओं के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा, “यह हिंदी का आयोजन है तभी तो बदहाली है, लेकिन अंग्रेजी का होता तो यह न होता। मुझे इस बात का गुस्सा नहीं है कि यहां गर्मी है, अन्य अव्यवस्थाएं हैं, खेद इस बात का है कि एक कप चाय भी नहीं है।”
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