झाबुआ विस्फोट : प्रियजनों की तलाश में भटक रहे लोग

भोपाल, 13 सितंबर (आईएएनएस)। झाबुआ विस्फोट में मारे गए या घायल हुए कई लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की तस्वीरें साथ लिए उन्हें तलाशने में जुटे हैं। कई ऐसे भी हैं, जो अपनों की मौत से अब भी बेखबर हैं।

भोपाल, 13 सितंबर (आईएएनएस)। झाबुआ विस्फोट में मारे गए या घायल हुए कई लोगों के परिजन अपने प्रियजनों की तस्वीरें साथ लिए उन्हें तलाशने में जुटे हैं। कई ऐसे भी हैं, जो अपनों की मौत से अब भी बेखबर हैं।

झाबुआ के पेटलावाद में शनिवार सुबह चाय-नाश्ते की एक दुकान में गैस सिलिंडर फट जाने के बाद बगल में स्थित विस्फोटकों के गोदाम में जोरदार विस्फोट हुआ था, जिसमें कम से कम 87 लोगों की जान चली गई और सौ से ज्यादा घायलों का अब भी पेटलावाद के अलावा इंदौर, रतलाम और दाहोद के अस्पतालों में उपचार चल रहा है।

इस हादसे में जीवित बचे लोग विस्फोट बाद का मंजर याद कर अब भी सिहर उठते हैं। उनकी आंखों के सामने खौफनाक मंजर उभर आता है। वे बताते हैं कि हादसे के बाद हर तरफ क्षत-विक्षत शव बिखर गए थे, कई मकान मलबे में तब्दील हो गए थे और सिर्फ चीखें सुनाई दे रही थीं।

मजदूरी करने वाले पुष्कर बताते हैं, “मैं अपने बेटे रवि के साथ चाय पीकर काम पर जा रहे था, तभी एक स्थान पर स्पार्किं ग की बात चली। मेरा बेटा स्पार्किं ग देखने चला गया, मैंने उसे रोका भी मगर उसने नहीं माना और पलभर बाद हुए विस्फोट में हर तरफ शव ही शव, उनमें मेरे बेटे का निष्प्राण शरीर भी था।”

विस्फोट के एक दिन गुजर जाने के बाद मौके पर कई ऐसे लोग अपनों को तलाशते नजर आए, जो अपने हाथों में पहचानपत्र की छाया प्रतियां या तस्वीरें लिए हुए थे। वे पोस्टमार्टम स्थल से लेकर अंतिम संस्कार स्थल तक गए, मगर उन्हें उनके प्रियजनों के बारे में जानकारी देने वाला कोई नहीं मिला।

हादसे की वीभत्सता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई लोगों की शिनाख्त उनके कपड़ों और शरीर पर पहले से मौजूद चोट आदि के निशानों से हुई है।

इन्हीं में से दो छात्र हैं प्रिंस और प्रशांत, जो सेठिया होटल के पीछे स्थित कोचिंग में पढ़ने आते थे। ये दोनों रोज की तरह शनिवार को भी कोचिंग पढ़ने पहुंचे थे। दोनों शनिवार देर शाम तक घर नहीं पहुंचे, तो उनकी तलाश की गई। दोनों के शव अस्पताल में मिले। एक शव बिना सिर के मिला। उसकी पहचान कपड़ों और जेब में पड़े पहचानपत्र से प्रिंस के तौर पर हुई।

इसी तरह बद्रीलाल का शव भी बिना सिर के मिला और शरीर पर पहले से मौजूद चोट के निशान से उसकी पहचान हुई।

मासूम अक्षत (12) के पैर की हड्डी टूट गई है, और सिर पर चोट आई है। उसका रतलाम के अस्पताल में उपचार चल रहा है, वह कहता है कि उसके मम्मी-पापा घर पर हैं। मगर हकीकत यह है कि उसके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं।

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