मंच के नेता नेता लक्षमण प्रसाद ने कहा कि मोदी शासन में हिंदुत्ववादी वैचारिक कुंठाएं खुल कर सामने आ गई हैं। जो लोग स्वयं तो कुछ भी रचनात्मक और सकारात्मक कर पाने में अक्षम हैं, वे उन्हें मारकर, धमकी देकर पूरी दुनिया में भारत को बदनाम कर रहे हैं, जो बेहतर समाज के निर्माण में अपनी रचनात्मक भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की सपा सरकार द्वारा भी भाजपा का ही रास्ता अख्तियार कर लिया गया है और इसीलिए हाशिमपुरा के इंसाफ की मांग करने वाले नेताओं और बुद्धिजीवियों पर दंगा भड़काने का मुकदमा दर्ज किया जा रहा है तो कहीं एक समाचारपत्र की महिला संपादक को दुष्कर्म की धमकी दी जा रही है, जो साबित करता है कि अभिव्यक्ति की आजादी से सिर्फ संघ परिवार को ही खतरा नहीं है, बल्कि अपने को ‘समाजवादी’ कहने वाली उत्तर प्रदेश सरकार को भी इससे भय सता रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य के संरक्षण में पोषित इस आतंकवाद के खिलाफ रिहाई मंच बटला हाउस फर्जी मुठभेड़ की सातवीं बरसी पर 19 सितंबर को दोपहर डेढ़ बजे से ‘शासन प्रायोजित आतंकवाद और वंचित समाज’ विषय पर यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ में सेमिनार आयोजित करेगा, जिसमें मुख्य वक्ता प्रसिद्ध इतिहासकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शम्सुल इस्लाम होंगे।
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