यमुना के लिए साबरमती मॉडल ठीक नहीं : कपिल मिश्रा (साक्षात्कार)

नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के जल मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि गुजरात की साबरमती रिवरफ्रंट परियोजना राजधानी में यमुना के लिए मॉडल नहीं बन सकती। यह यमुना के लिए विनाशकारी और आंख में धूल झोंकने वाली साबित होगी।

नई दिल्ली, 18 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली के जल मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि गुजरात की साबरमती रिवरफ्रंट परियोजना राजधानी में यमुना के लिए मॉडल नहीं बन सकती। यह यमुना के लिए विनाशकारी और आंख में धूल झोंकने वाली साबित होगी।

मिश्रा ने आईएएनएस से खास मुलाकात में कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच यमुना की सफाई के मामले में सामंजस्य और सौहार्द बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (केंद्र ने) अपनी इच्छा दिखाई है। उमा भारती जी (केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास मंत्री) ने अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। हम सामंजस्य से काम कर रहे हैं।”

केजरीवाल सरकार में सबसे कम उम्र के मंत्री 34 साल के कपिल मिश्रा ने कहा, “देश भर में साबरमती नदी के मॉडल की चर्चा हो रही है। यह विनाशकारी है और आंख में झूल झोंकने वाला है।”

उन्होंने कहा, “मैंने इस मॉडल को देखा है और केंद्र सरकार से कह दिया है कि हम यमुना पर इसे लागू नहीं करने जा रहे हैं।”

साबरमती रिवरफ्रंट को अहमदाबाद में साबरमती नदी के किनारे विकसित किया गया है। साबरमती में नर्मदा का पानी छोड़ा गया है।

दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग एक समय में यमुना के लिए साबरमती वाटरफ्रंट जैसी योजना की वकालत कर चुके हैं। जंग और केजरीवाल सरकार की एक-दूसरे से दूरी किसी से छिपी नहीं है।

मिश्रा ने कहा, “उन्होंने नर्मदा का पानी लेकर तालाब जैसी स्थिति बनाई है। लोग जो देखते हैं वह नर्मदा का पानी है। साबरमती आज भी गंदी है। हम इस तरह का कृत्रिम सुधार नहीं करने जा रहे हैं। हम तालाब बना कर लोगों को उसे नहीं दिखाएंगे। हम यमुना को साफ करेंगे।”

मिश्रा ने कहा कि यमुना की सफाई के लिए वह ‘दुश्मनों’ के दरवाजे तक जाएंगे। उन्होंने कहा, “एक बात जो मैं आपसे कह सकता हूं कि यमुना की सफाई के लिए मैं किसी के भी दरवाजे पर जाऊंगा। फिर चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस हो या हमारे दुश्मन का ही क्यों न हो। यमुना की सफाई का काम राजनीति से परे है।”

मिश्रा ने यमुना के 22 किलोमीटर के दायरे की सफाई के लिए 36 महीने की समयसीमा निश्चित की है, जिसे पूर्ववर्ती सरकारों ने दो दशकों में नहीं कर पाए।

मिश्रा ने कहा कि हम 36 महीने में इसे साफ करके दिखाएंगे और इसके बाद हमलोग इसमें स्नान करने जा सकते हैं।

यमुना की सफाई के लिए पहला एक्शन प्लान 1993 में बना था उसके बाद से अब तक इस तरह की तीन योजनाएं बनाई जा चुकी हैं और इन पर 1500 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन यमुना अब भी गंदे नाले की तरह ही है।

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