शिलॉंग, 21 सितम्बर (आईएएनएस)। मेघालय में महिलाओं एक प्रभावशाली संगठन, सिविल सोसायटी वूमेंस ऑर्गनाइजेशन (सीएसडब्ल्यूओ) ने भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल) की उस योजना का विरोध किया है, जिसमें यहां यूरेनियम की नई खदान खोलने की योजना बनाई गई है। मेघायल देश में यूरेनियम वाला तीसरा राज्य है।
सीएसडब्ल्यूओ की अध्यक्ष एगे्नस खारशिंग ने कहा, “हम सीडब्ल्यूएसओ के लोग मेघालय में किलेंग-पिंगदेंगसोहियोंग-माथाबाह (केपीएम) परियोजना में नई यूरेनियम खदानें खोलने के यूसीआईएल के कदम का विरोध करते हैं, क्योंकि यह आने वाली पीढ़ियो के लिए हमारे राज्य के लोगों की जिंदगी तबाह कर देगा और संगठन इस तबाही की इजाजत नहीं देगा।”
एग्नेस ने कहा, “अगर यूसीआईएल खनन के लिए दबाव जारी रखता है और चतुराई से खनन करता है, तो हम उस पर जानबूझ कर राज्य के नागरिकों की हत्या की कोशिश के लिए अपराधिक मामला दर्ज कराएंगे। इन क्षेत्रों और पूरे राज्य के निवासियों को यूरेनियम खनन के खतरों और उसके अवशेषों से पैदा होने वाले कैंसर के बारे में जानकारी देना जरूरी है।”
खरशिंग ने कहा, “यह आश्चर्यजनक है कि यूसीआईएल इन क्षेत्रों में सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्कूल की सुविधाएं प्रदान कर रहा है। ऐसा क्यों है कि सरकार इन क्षेत्रों में ये काम नहीं कर सकती और जानबूझ कर ग्रामीण इलाकों को अविकसित छोड़ देती है, ताकि कंपनियां यहां आदिवासियों की सहायता के नाम पर उनका शोषण कर सकें।”
सीएसडब्ल्यूओ ने यह भी कहा कि राज्य प्रशासन और सरकार को इन इलाकों के पिछड़ेपन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए और इन क्षेत्रों के विकास का जिम्मा खुद लेना चाहिए, लेकिन यूरेनियम के खनन के बदले नहीं।
झारखंड और आंध्र प्रदेश के बाद मेघालय देश का तीसरा यूरेनियम सम्पन्न राज्य है। देश के यूरेनियम भंडार का 16 फीसदी हिस्सा मेघालय में है।
यूसीआईएल ने मेघालय में परियोजना का करार 1,100 करोड़ में किया था। यूसीआईएल की प्रतिवर्ष 3,75,000 टन कच्चे यूरेनियम के उत्पादन की योजना है।
इससे पहले मेघालय के मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने कहा था कि राजनीतिक दलों सहित विभिन्न समाजिक संगठनों द्वारा स्वास्थ्य और पर्यावरणीय कारणों का हवाला देते हुए विरोध के बाद भी सरकार राज्य में यूरेनियम खनन की योजना लागू करने से पीछे नहीं हटेगी।
केंद्रीय परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने हालांकि हाल ही में कहा था कि भाभा परमाणु ऊर्जा अनुसंधान केंद्र में भी काम करने वालों पर हुए अध्ययन में उनके स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पाया गया है।
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