जबलपुर, 23 सितम्बर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में समान कार्य समान वेतन और संविलियन की मांग को लेकर 13 सितम्बर से शिक्षण कार्य का बहिष्कार कर रहे संविदा शिक्षकों और अध्यापकों को जबलपुर उच्च न्यायालय ने काम पर लौटने के निर्देश दिए हैं। ऐसा न होने पर सरकार हड़ताली शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही को स्वतंत्र है।
याचिकाकर्ता दिलीप सोनी ने आईएएनएस को बताया है कि उनकी ओर से संविदा शिक्षकों और अध्यापकों की हड़ताल से अध्यापन कार्य पर पड़ रहे प्रभाव का जिक्र करते हुए उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति सी. बी. सिरपुरकर की युगलपीठ ने हड़ताल को असंवैधानिक करार दिया है।
सोनी ने आगे बताया कि उन्होंने जनहित याचिका के जरिए बच्चों के शिक्षा के अधिकार के हनन, छात्रों की समस्या सहित प्रदेश की शिक्षण समस्या का मसला उठाया था। इस पर न्यायालय ने यह आदेश दिया है।
दूसरी तरफ हड़ताली अध्यापकों का कहना है कि वे कानूनी परामर्श ले रहे हैं और न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे।
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