सीएनएनसी तथा फ्रांस के एरेवा द्वारा इस परियोजना का निर्माण साल 2020 में शुरू होकर साल 2030 में खत्म होने की संभावना है।
परमाणु पुनर्चक्रण का मतलब, उपयोग में लाए जा चुके परमाणु ईंधनों में बचे यूरेनियम व प्लूटोनियम का फिर से इस्तेमाल करना है।
परियोजना के तहत घरेलू परमाणु बिजली केंद्रों से निकले 800 टन परमाणु सामग्री का पुर्नससाधन किया जाएगा।
परियोजना में उपयोग में लाए जा चुके ईंधन का संग्रह करना, परमाणु बिजली केंद्र से निकलने वाली सामग्री का प्रबंधन करना व तरल अपशिष्ट को ठोस में बदलने का काम किया जाएगा।
संभावना जताई जा रही है कि साल 2030 तक चीन के दाबयुक्त जल रिक्टरों द्वारा 23,500 टन खर्च किए जा चुके ईंधन जमा हो चुके होंगे।
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