वाशिंगटन, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सालभर के अंदर जहां अमेरिका की दूसरी यात्रा पर निकले हैं, वहीं एक प्रमुख समाचार पत्र ने उन्हें भारतीय आर्थिक नवजागरण की सर्वोत्तम उम्मीद बताया है, जबकि एक अन्य समाचार-पत्र ने यह भी संभावना जताई है कि भारत के पड़ोसियों के साथ कूटनीतिक मोर्चे पर वह असफल साबित हो सकते हैं।
किंग्स कॉलेज लंदन में रक्षा अध्ययन के प्रोफेसर हर्ष वी पंत ने समाचार पत्र वाल स्ट्रीट जर्नल में एक आलेख में लिखा है, “सीधे अमेरिकी कंपनियों से रिश्ता गांठकर मोदी अमेरिका के साथ आर्थिक रिश्ता मजबूत करने और भारत को आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की उम्मीद कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “कोई आश्चर्य नहीं कि इस यात्रा में अधिकांश समय मोदी अमेरिकी कंपनियों के प्रमुखों से मिलने में बिताएंगे।”
पंत ने कहा, “अन्य दौरे की तरह भारत के आर्थिक पुनर्जागरण में वह भारतीय मूल के अमेरिकियों की मदद चाहेंगे।”
पंत ने महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित नहीं हो पाने का दोष विपक्ष पर मढ़ा और कहा, “आर्थिक पुनर्जागरण के लिए वह भारत की सर्वोत्तम उम्मीद हैं।”
उन्होंने लिखा, “उनकी लोकप्रियता बरकरार है और उनके नेतृत्व में देश के भविष्य को लेकर अत्यधिक आशा की जा रही है।”
उन्होंने कहा कि अपनी इस लोकप्रियता को भुनाते हुए वह अमेरिकी निवेशकों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करेंगे कि भारत की कहानी बस शुरू ही हुई है और उनके नेतृत्व में अगला अध्याय लिखा जा सकता है।
दूसरे समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट ने भारत के पड़ोसियों के साथ मोदी की सफलता पर संदेह जताया।
पोस्ट में नई दिल्ली से लिखे गए एक आलेख में कहा गया, “विदेश यात्रा के दौरान थोड़े रोबोटिक और सहमे हुए दिखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बाद मोदी की रॉक स्टार जैसी विदेश यात्रा लीक से हटकर है।”
आलेख में आगे कहा गया है, “लेकिन क्या मोदी की विदेश यात्राओं के परिणाम मिल रहे हैं? यदि आप नेपाल और पाकिस्तान को देखें तो नहीं।”
वाशिंगटन पोस्ट के आलोख में आगे कहा गया, “कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या मोदी की कूटनीति का असर हो रहा है?” इसमें आगे कहा गया है, “फिर भी तकरीबन सभी लोकप्रियता सर्वेक्षणों में मोदी की विदेश यात्रा को अधिक अंक मिल रहा है।”
dharmpath.com dharmpath