नई दिल्ली, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार शराब के सेवन के लिए कानूनी उम्र को कम करने पर विचार कर सकती है। अरविंद केजरीवाल सरकार में एक मंत्री ने बुधवार को यह जानकारी दी।
नई दिल्ली, 24 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली सरकार शराब के सेवन के लिए कानूनी उम्र को कम करने पर विचार कर सकती है। अरविंद केजरीवाल सरकार में एक मंत्री ने बुधवार को यह जानकारी दी।
राष्ट्रीय राजधानी में नेशनल रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) की 33वीं सालाना बैठक में रेस्तरांओं को संबोधित करते हुए दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा, “मुझे लगता है कि शराब के सेवन के लिए कानूनी उम्र 25 साल बहुत अधिक है। इसे कम किया जाना चाहिए।”
उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी के रेस्तरां व इवेंट कंपनियों से शराब के सेवन की सही उम्र से संबंधित प्रस्तावों को पेश करने को कहा। उन्होंने कहा, “मैं आपसे सही सुझाव के साथ आने का निवेदन करता हूं, हम उस पर विचार करेंगे।”
उन्होंने कहा, “कई पुराने कानून हैं, जिन्हें बदलने की जरूरत है। हम उनमें सुधार लाने की भरसक कोशिश करेंगे और दिल्ली को खासकर पर्यटकों के लिए एक बेहतर जगह बनाएंगे।”
यह पूछे जाने पर कि कितनी जल्दी समीक्षा होगी और घटाई गई उम्र क्या होगी, मंत्री ने आईएएनएस से कहा, “हम विभिन्न तथ्यों पर विचार करने के बाद फैसला करेंगे, इसलिए मैं आपसे सही-सही उम्र के बारे में नहीं बता सकता। समीक्षा करने और नए प्रस्ताव का क्रियान्वयन करने में निश्चित तौर पर कुछ समय लगेगा।”
एनआरएआई के अध्यक्ष रियाज अमलानी ने राष्ट्रीय राजधानी में शराब पीने के लिए कानूनी उम्र से संबंधित कानून पर समीक्षा की अपील की थी, जिसके बाद मंत्री ने यह प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
उन्होंने कहा, “यहां तक कि शादी के लिए लड़के की उम्र 21 वर्ष व लड़कियों की 18 वर्ष तय की गई है।”
दिल्ली अकेला राज्य नहीं है, जहां शराब के सेवन की उम्र 25 वर्ष तय की गई है, बल्कि चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र व मेघायल में भी यही उम्र सीमा तय है।
मंत्री ने कहा कि रेस्तरां उद्योग शहर की सांस्कृतिक जीवंतता को जोड़ने व पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खासकर दिल्ली जैसे शहर को विभिन्न विरासत स्थलों के कारण इसका लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा, “दिल्ली को पर्यटकों के लिए सबसे बेहतरीन जगह बनाने के लिए हम सबको मिलकर काम करने की जरूरत है।”
एनआरएआई के मुताबिक, खाद्य सेवा उद्योग में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है, जो 247,680 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और होटल क्षेत्र की तुलना में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सात गुना अधिक योगदान दे रहा है।
एनआरएआई के एक बयान के मुताबिक, साल 2018 तक रेस्तरां उद्योग के 25 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाने की उम्मीद है।
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