नई दिल्ली, 26 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष अदालत ने साल 2002 के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में आरोप तय करने पर आदेश देने के लिए शनिवार को सात अक्टूबर की तारीख तय की।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत के न्यायाधीश ओ.पी.सैनी को आदेश शनिवार को पारित करना था, लेकिन उन्होंने इसे बढ़ाकर सात अक्टूबर कर दिया।
अदालत ने कहा कि आदेश तैयार नहीं है, क्योंकि मामले का रिकॉर्ड बेहद बड़ा है।
अदालत उसी दिन मामले में आरोपी पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष की जमानत याचिक पर भी विचार करेगी।
उल्लेखनीय है कि सीबीआई ने पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष व तीन दूरसंचार कंपनियों-भारती सेल्यूलर लिमिटेड, हचिंसन मैक्स टेलीकॉम प्राइवेट लिमिटेड (वोडाफोन इंडिया लिमिटेड) तथा स्टर्लिग सेल्यूलर लिमिटेड (वोडाफोन मोबाइल सर्विस लिमिटेड) के खिलाफ 21 दिसंबर, 2012 को आरोप पत्र दाखिल किया था।
मामला दूरसंचार विभाग द्वारा 31 जनवरी, 2002 को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के आवंटन के संबंध में लिए गए फैसले से संबंधित है, जिसके कारण सरकारी खजाने को कथित तौर पर 846 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उस वक्त राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार सत्ता में थी।
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