इस घटना का खुलासा करते हुए झांसी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मोंठ थाना पुलिस ने दो हत्यारोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है।
एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने बताया कि थाना मोंठ पुलिस को 21 सितंबर को झांसी-कानपुर हाईवे मार्ग पर अमरा-पाड़री लिंक रोड पर कार (यूपी 93 के 3441) क्षतिग्रस्त हालत में खाली मिली थी। छानबीन में पता चला कि यह कार ग्राम पाड़री निवासी नीमा राजपूत पत्नी स्व. वीर बहादुर की है।
पुलिस ने जब नीमा के परिजनों से संपर्क किया तो उसकी बेटी काजोल ने बताया कि उसके पिता का 2011 में देहांत हो गया था, इसके बाद उसके भाई का भी देहांत हो गया। घर में वह और उसकी मां नीमा राजपूत और कार चालक रामजी विश्वकर्मा रहते हैं। काजोल ने बताया कि उनकी जमीन पर परिवार के बाकी सदस्यों की नजर है, जिस कारण वे उसकी मां से रंजिश रखते हंै।
नीमा की बेटी ने कहा कि 20 सितंबर को उसकी मां व कार चालक इलाज कराने के लिए झांसी गए हुए थे, तब से लौटकर घर नहीं आए। काजोल की शिकायत के आधार पुलिस ने लड़की के चाचा, दादा और चचेरे भाई के खिलाफ मामला दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू कर दी थी।
पुलिस ने बताया कि अभी तलाश चल ही रही थी कि तभी समथर थाने की पुलिस से 22 सितंबर की दोपहर उन्हें जानकारी हुई कि ग्राम छपार के नजदीक निकली नहर में एक युवक का शव उतराता हुआ मिला है, जिस पर वह मृतका की बेटी काजोल और उसके चालक के परिवार को लेकर मौके पर पहुंचे और उतराते शव की शिनाख्त रामजी विश्वकर्मा के रूप कराई।
इसके बाद 23 सितंबर को ग्राम साकिन के नजदीक मृतका का शव भी नदी में उतराता मिला। शक अब यकीन में बदल गया कि हत्या कर उनके शव को नदी में फेंका गया।
संदेह होने पर जब पुलिस ने भतीजे बॉबी उर्फ गजेंद्र राजपूत पुत्र दशरथ और विजय बहादुर राजपूत पुत्र जगदीश को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि नीमा के अपने कार चालक से अवैध संबंध थे, जिस कारण पूरे समाज में उनकी बदनामी हो रही थी, इधर जमीन भी हाथों से खिसकी जा रही थी। इसी कारण उन्होंने उनकी हत्या कर शव को नदी फेंक दिया था। पुलिस ने पकड़े गए हत्यारोपियों को जेल भेज दिया है।
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