नई दिल्ली, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोमवार को होने वाली मुलाकात से दोनों देशों के संबंधों में ताजगी आएगी। इस मुलाकात में आपसी व्यापार और सुरक्षा के मुद्दे पर वार्ता हो सकती है।
मर्केल रविवार रात यहां पहुंचेंगी और मंगलवार तक रहेंगी। उनके साथ आने वाले प्रतिनिधिमंडल में छह मंत्री और कई कारोबारी शामिल होंगे। वे बेंगलुरू भी जाएंगी।
मर्केल दोनों देशों के बीच तीसरे अंतर सरकारी वार्ता के सिलसिले में आ रही हैं।
इससे पहले अप्रैल 2015 में प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला हनोवर मेसे के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इस मेले में भारत साझेदार देश था।
जर्मनी के राजदूत मार्टिन ने दो दिन पहले कहा था कि जर्मनी भ्रष्टाचार, निवेश के प्रारूप, कराधान की सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार और व्यापार की सुविधा की वैधानिक व्यवस्था जैसे मुद्दे पर बात करेगा।
दोनों नेता भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी वार्ता कर सकते हैं।
सोमवार को मर्केल का राष्ट्रपति भवन में राजकीय स्वागत होगा। इसके बाद वह राजघाट जाएंगी। फिर दोनों नेताओं की आधिकारिक मुलाकात होगी और दोनों प्रतिनिधिमंडलों के बीच अंतर-सरकारी वार्ता होगी।
मर्केल राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मिलेंगी।
विदेशमंत्री सुषमा स्वराज अपने समकक्ष फ्रैंक वाल्टर स्टेनमीयर से तथा मर्केल से भी मिलेंगी।
मोदी और मर्केल के बीच रक्षा, सुरक्षा, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, उच्च प्रौद्योगिकी विनिर्माण, कौशल विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रेलवे, जल और अवजल प्रबंधन, शहरी विकास तथा कृषि में सहयोग जैसे कई मुद्दों पर बात होगी।
दोनों नेता छह अक्टूबर को बेंगलुरू में नैसकॉम द्वारा इंडस्ट्री 4.0 पर आयोजित एक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दोनों नेता जर्मनी की कंपनी बोश के नवाचार और कौशल परिसर की भी यात्रा करेंगे।
भारत और जर्मनी 2001 से रणनीतिक साझेदार हैं। यूरोपीय संघ में जर्मनी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। जर्मनी भारत में सातवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।
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