तमिल लेखक पेरुमल को ‘आईएलएफ’ पुरस्कार

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर (आईएएनएस)। तमिल लेखक पेरुमल मुरुगन को पांचवें भारतीय भाषा समारोह (आईएलएफ) में ‘समन्वय भाषा सम्मान’ पुरस्कार से नवाजा जाएगा। पुरस्कार की घोषणा सोमवार को की गई थी।

लेखक-कवि मुरुगन ने यह पुरस्कार अपने उपन्यास ‘मधोरुभागन’ के लिए जीता है। उपन्यास के लिए मुरुगन को हिंदू गुटों के विरोध का सामना करना पड़ा था। उन पर दबाव बनाया गया था कि वे भलाई चाहते हैं तो लिखना छोड़ दें।

मुरुगन ने एक बयान में कहा, “आईएलएफ पुरस्कार देकर पुरानी और अटूट साहित्यिक परंपरा वाली तमिल भाषा को आधुनिक मान्यता दी गई है। उम्मीद है कि एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण में मेरी भाषा को दी गई यह मान्यता एक मस्से को चमकता रत्न बनाने जैसा साबित होगा।”

मुरुगन को 28 नवंबर को यहां यह पुरस्कार दिया जाएगा।

समारोह का उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर भारतीय भाषाओं के बीच संवाद स्थापित करना है। यह समारोह विशिष्ट रूप से भारतीय भाषाओं को समर्पित एकमात्र साहित्यिक समारोह के रूप में उभरा है।

मुरुगन के लेखन से जाति दमन के भविष्य और आधुनिक तमिलनाडु में लोकाचार की गुलामी पर चर्चा छिड़ गई थी।

समारोह के निदेशक राकेश कैकर के मुताबिक, “मधोरुभागन को दिया गया यह पुरस्कार इस बात को मान्यता मिली है कि किस प्रकार एक लेखक और उसका लेखन समाज की सेवा कर सकता है और इतिहास को उसकी आधुनिक हकीकतों और सपनों से जोड़ सकता है।”

मुरुगन के नौ उपन्यास, चार लघुकथा संग्रह और चार कविताओं संकलन प्रकाशित हैं।

उनके तीन उपन्यासों का अंग्रेजी में अनुवाद हुआ है। इनमें से एक ‘सीजन्स ऑफ पाम’ को प्रतिष्ठित किरियामा पुरस्कार के लिए चुना गया है। दो अन्य अनूदित उपन्यास हैं ‘करंट शो’ और ‘वन पार्ट वुमेन (मधोरुभागन)’।

‘मधोरुभागन’ उपन्यास का विरोध करते हुए हिंदूवादी संगठनों ने उन पर हमला किया था। इसके बाद मुरुगन ने जनवरी की शुरुआत में घोषणा की थी कि उन्होंने लेखन त्याग दिया है और अब एक शिक्षक मात्र रहेंगे।

मुरुगन ने उन दिनों कहा था, “लेखक मुरुगन की मृत्यु हो चुकी है। वह अब शिक्षक के रूप में ही जीएगा।”

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