लोकनायक के प्रयास से चंबल में आई थी शांति : चौहान

भोपाल, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 113वीं जयंती सभी संभागों एवं संगठनात्मक जिला केंद्रों में ‘लोकतंत्र रक्षा दिवस’ के रूप मनाई। राजधानी में आयोजित समारोह में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान ने लोकनायक के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने चंबल के डकैतों का हृदय परिवर्तन कर शांति की पुनस्र्थापना की थी।

भाजपा के प्रदेश कार्यालय परिसर में आयोजित मीसाबंदियों के अभिनंदन समारोह में बड़ी संख्या में बिहार, पूर्वाचल, मिथिलांचल, सीमांचल और झारखंड के परिवारजन भी शामिल हुए और लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

लोकनायक का पुण्य स्मरण करते हुए चौहान ने कहा कि यह लोकनायक के व्यक्तित्व की विशेषता थी कि उन्होंने चंबल के दुर्दान्त डकैतों को शांति के मार्ग पर लाने के लिए उनका हृदय परिवर्तन किया, जिससे उन्होंने शासन के सामने आत्म-समर्पण कर दिया।

इससे चंबल, ग्वालियर, बुंदेलखंड अंचल में शांति की पुनस्र्थापना हुई, आज बारूदी गंध से चबंल यदि बीहड़ मुक्त है तो इसका श्रेय जयप्रकाश नारायण को जाता है।

उन्होंने कहा कि जब बड़े जमीदारों से एक इंच जमीन सरकार को प्राप्त करना मुश्किल था, जयप्रकाश नारायण ने भू-दान यात्राएं की और हजारों एकड़ जमीन भू-दान आंदोलन के माध्यम से प्राप्त कर भूमिहीनों को भेंट की और उन्हें भूमि स्वामित्व का गौरव दिलाया, वास्तव में यह मूक क्रांति थी। लोकनायक महान क्रांति के जनक थे।

आज उनकी जन्मस्थली बिहार ऐसे तत्वों के शोषण का शिकार है जो लोहिया और लोकनायक की विरासत का दावा करके उनके आदर्शो के साथ विश्वासघात कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बिहार के विधानसभा चुनाव में जनता लाल ूप्रसाद यादव और नीतीश कुमार के चंगुल से मुक्त होने के लिए छटपटा रही है। बिहार को शोषक तत्वों से मुक्त कराना लोकनायक के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

लोकनायक जयप्रकाश नारायण को श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री अरविंद मेनन ने कहा कि आज बिहार में लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार जैसे वरिष्ठ नेता लोकनायक की विरासत से ही समृद्ध हुए हैं। लेकिन उन्होंने लोकनायक के सिद्धांतों के विपरीत कार्य करके बिहार की जनता को पिछड़ेपन के गर्त में तो धकेला है, साथ ही जिन आदर्शो को लेकर डॉ़ लोहिया, लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने राष्ट्रीय एकता का ताना-बाना बुना था, उसे जातिवाद, फिरकापरस्ती के दलदल में फंसा दिया है।

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