भिंड, 16 अक्टूबर (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश में फसल की बर्बादी से हताश और निराश कई किसान आत्महत्या कर चुके हैं। यही नहीं प्रशासन का रवैया किसानों के प्रति और भी निष्ठुर बना हुआ है।
किसानों को ढाढ़स बंधाने के बजाय प्रशासन उन्हें धमकाने और झिड़कने पर लगा हुआ है। भिंड जिले की निवासी एक महिला किसान के साथ ऐसा ही कुछ हुआ है।
जिले की एक महिला किसान अपनी व्यथा सुनाने मंगलवार को आयोजित जन-सुनवाई में जिलाधिकारी मधुकर आग्नेय के समक्ष पहुंची। महिला ने जब फसल की बर्बादी का जिक्र किया तो आग्नेय ने भड़क उठे। उन्होंने कहा, “तुमसे किसने कहा था कि धान की फसल उगाओ। क्यों लगाते हो धान? जब पानी नहीं बरसता।”
ट्यूबवेल में पानी न आने और बिजली न मिलने की शिकायत पर आग्नेय ने महिला से सवाल किया, “टांसफार्मर लगाने में बहुत पैसा लगेगा, दे पाओगी उतना पैसा?”
महिला ने जिलाधिकारी आग्नेय को बताया कि बिजली विभाग के अफसरों ने ट्रांसफार्मर लगाने से साफ इनकार कर दिया है, लेकिन वह पूरा प्रयास कर अपने लिए ट्रांसफार्मर लगवाएगी।
महिला के प्रति जिलाधिकारी के इस व्यवहार का वीडियो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस वीडियो के बारे में आईएएनएस ने जब आग्नेय से शुक्रवार को पूछा, तो उन्होंने कहा, “भिंड वह इलाका है, जहां बारिश काफी कम होती है, जो धान की फसल के लिए पर्याप्त नहीं है। एक अभियान चलाकर किसानों को कम पानी खपत वाली फसलों को बोने के लिए समझाया जा रहा है।”
उन्होंने कहा, “इसीलिए उस महिला को जनसुनवाई में यह समझाया गया कि धान की फसल नहीं बोनी चाहिए थी। मगर उनकी इस समझाइश को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।”
आग्नेय ने कहा, “जिले में छह हजार हेक्टेयर में किसान धान की खेती करते हैं। पानी की कमी के चलते प्रशासन पर तालाब या नहर से पानी छोड़ने के लिए दवाब बनाया जाता है। पीने का पानी खेती को देने से बचने के लिए ही किसानों को सलाह दी जा रही है।”
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