नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन 2015 एक बेहतर भविष्य के लिए भारत और अफ्रीका की अधिक गहराई से एक-दूसरे के साथ जुड़ने की इच्छा को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन 2015 की मेजबानी के लिए भारत को गर्व है। यह सम्मेलन एक बेहतर भविष्य के लिए भारत और अफ्रीका की अधिक गहराई से एक-दूसरे से जुड़ने की इच्छा को दर्शाता है।”
मोदी ने कहा कि शिखर सम्मेलन के लिए भागीदारी में वृद्धि हुई है और अफ्रीका के कई नेता इसमें हिस्सा लेने वाले हैं।
मोदी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, “अफ्रीका के साथ भारत के संबंध ऐतिहासिक हैं। अफ्रीका में भारत एक प्रमुख निवेशक है और हाल के सालों में व्यापार में काफी वृद्धि हुई है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि मित्रता और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई अन्य कार्यक्रमों के भी आयोजन किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और अफ्रीका का रिश्ता काफी करीब का रहा है।
मोदी ने ‘मेमोरीज ऑफ महात्मा’ प्रदर्शनी का भी जिक्र किया और कहा कि यह बापू के जीवन तथा अफ्रीका के साथ उनके रिश्तों को दर्शाता है।”
कृषि, समुद्री अर्थव्यवस्था और सुरक्षा अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंधों के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
भारत-अफ्रीका व्यापार पर एक संगोष्ठी का आयोजन दिल्ली में 26 से 29 अक्टूबर तक किया जाना है, जिसमें दोनों देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम), नवतेज सरना ने शुक्रवार को कहा था कि अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों का भारत का दृष्टिकोण साझेदारी को लेकर है।
उन्होंने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों को जोड़ने का एक और क्षेत्र है।
सरना ने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था या महासागरीय अर्थव्यवस्था अफ्रीका के लिए काफी जरूरी है और वह केन्या, तंजानिया, मॉरीशस जैसे देशों के साथ बातचीत कर रहे हैं।
सरना ने कृषि को अफ्रीका के साथ साझेदारी के लिए अन्य क्षेत्र के रूप में दर्शाया।
सचिव ने बताया कि अफ्रीका के साथ भारत का व्यापार अब 70 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
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