लखनऊ, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक सोमवार को फिर से सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) के निशाने पर आ गए। सपा के महासचिव रामगोपाल यादव ने उन पर आरएसएस कार्यकर्ता की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया।
नाईक के खिलाफ पहले भी कटु शब्दों का प्रयोग कर चुके यादव ने कहा कि वह कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार के साथ इस तरह व्यवहार कर रहे हैं, जैसे गृह मंत्री हों।
यादव ने यह कहते हुए कि वह ऐसा कहने को मजबूर हैं, मीडिया को कहा, “राज्यपाल के पद की एक गरिमा होती है और इस पद पर बैठे व्यक्ति अपने पद की सीमाओं का बार-बार उल्लंघन करता रहा है।”
सपा नेता ने कहा कि नाईक पिछले महीने दादरी में गोमांस खाने की अफवाह पर एक मुसलमान बुजुर्ग मोहम्मद अखलाक की हत्या पर चुप रहे, लेकिन राज्य में होने वाली अन्य सांप्रदायिक घटनाओं पर उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया दी।
सपा नेता ने नाईक पर मुख्यमंत्री से हुई उनकी बातचीत की गोपनीयता भंग करने का आरोप भी लगाया।
सपा नेता मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के भाई और राज्यसभा में सपा सांसदों के प्रमुख रामगोपाल यादव ने कहा कि नाईक को नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में शामिल कर लें, यही बेहतर रहेगा।
पूर्व केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री नाईक के एक वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश का राज्यपाल बनने के बाद से उनके और सपा सरकार के बीच तलवारें खिंची हुई हैं।
हालांकि उनका कहना है कि सत्तारूढ़ दल से उनका अच्छा रिश्ता है, वह जोर देकर कहते हैं कि दायित्वों से बंधे होने के कारण वह सरकार के कामकाज की समस्याओं को उठा रहे हैं।
नाईक ने सोमवार को आईएएनएस को बताया कि वह उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर चिंतित हैं।
प्रदेश के दस जिलों में सांप्रदायिक तनाव के बारे में नाईक ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से बात करेंगे और स्थिति में सुधार लाने का आग्रह करेंगे।
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