शिलांग, 3 नवंबर (आईएएनएस)। मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार को गारो पहाड़ियों के आतंकवाद ग्रस्त जिलों में विवादास्पद सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून 1958 लागू करने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह सचिव और सुरक्षा सचिव को भी गारो हिल्स क्षेत्र में सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों की नियुक्ति और एएसएफए के प्रयोग का विचार करने का यह आदेश केंद्र सरकार के समक्ष रखते हुए, इसके अनुपालन का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय के मुख्य सचिव को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष विचार के लिए यह आदेश रखने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश उमानाथ सिंह, न्यायाधीश टी.एन.के. सिंह और न्यायाधीश एस.आर. सेन की पीठ का देर सोमवार का यह आदेश खुफिया विभाग के अधिकारी विकास कुमार सिंह और व्यवसायी कमल साहा का ‘अचिक सोनगना अनपचकगिपा कोटोक’ आतंकवादियों द्वारा और सरकारी अधिकारी ज्यूड रंगकू टी संगमा का ‘गारो नेशनल लिबरेशन आर्मी'(जीएनएलए) के आतंकवादियों द्वारा हाल ही में अपहरण कर लिए जाने के मद्देनजर आया है।
संगमा को मंगलवाल सुबह रिहा कर दिया गया था।
अदालत के मुताबिक, “स्थिति के नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार को गारो पहाड़ी क्षेत्र में एएसएफए के प्रयोग और सशस्त्र और अर्धसैनिक बलों की नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश देने के अतिरिक्त हमारे पास अन्य कोई विकल्प नहीं था।”
आदेश के मुताबिक, “हम इस तथ्य से भी अनभिज्ञ नहीं हैं कि बड़ी ताकत के साथ ही आत्म-संयम बरतने की बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। खासतौर पर यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अतंर्गत शक्ति के प्रयोग के मामले में लागू होता है। लेकिन चूंकि गारो पहाड़ियों में कानून व्यवस्था की स्थिति जरूरत से ज्यादा बिगड़ चुकी है, आम लोगों और जन सेवकों के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हमारे पास कुछ गंभीर निर्देश देने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं है।”
अदालत ने कहा, “अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद पुलिस और नागरिक प्रशासन फिरौती के लिए अपहरण और गैरकानूनी मांगें पूरी न होने पर हत्या को रोक नहीं पा रहे। स्थानीय आबादी आतंकवाद से प्रभावित हो रही है और केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया वित्त भी कानून व्यवस्था को सुधारने में नाकाम रहा है।”
अपने 13 पन्नों के आदेश में अदालत ने मेघालय पुलिस द्वारा दिए गए जनवरी से 31 अक्टूबर तक गारो हिल्स के विभिन्न हिस्सों में अपहरण के आंकड़े का हवाला भी दिया है।
आदेश में कहा गया है, “यह भी ज्ञात है कि गारो की अधिकांश आबादी गांवों में रहती है और जीवनयापन के लिए वे मुख्यतौर पर खेती पर निर्भर हैं। लगभग सात लाख की यह आबादी सुरक्षित महसूस नहीं कर रही और वे केवल विद्रोहियों की दया पर ही निर्भर हैं।”
इस बात की ओर इशारा करते हुए कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीशों को भी कई अज्ञात पत्रों से गुप्त धमकियां मिल रही हैं, पीठ ने कहा, “अपनी सुरक्षा के बारे में हमारा कुछ भी कहना उपयुक्त नहीं है जो कि फिलहाल राज्य की जिम्मेदारी है।”
अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख निश्चित की है।
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