बिहार : फर्जी पुलिस मुठभेड़ मामले में थाना प्रभारी समेत 8 बरी

पटना, 4 नवंबर (आईएएनएस)। पटना उच्च न्यायालय ने राजधानी के आशियाना नगर में फर्जी पुलिस मुठभेड़ में तीन छात्रों के मौत मामले में निचली अदालत से सजा पाए शास्त्रीनगर के तत्त्कालीन थाना प्रभारी सहित 8 लोगों को बुधवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

पटना उच्च न्यायालय के एक वकील ने बताया कि न्यायालय ने वर्ष 2002 में फर्जी मुठभेड़ में तीन छात्रों की हत्या मामले में शास्त्रीनगर थाने के तत्कालीन प्रभारी शम्से आलम और पुलिसकर्मी अरुण कुमार सिंह समेत आठ लोगों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

उन्होंने बताया कि न्यायालय ने बिहार सरकार को मृतकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने का भी आदेश दिया।

इस मामले में निचली अदालत ने जून 2014 में थाना प्रभारी शम्से आलम को फांसी तथा सात अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उल्लेखनीय है कि राजधानी के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र के आशियाना नगर बाजार में 28 दिसम्बर 2002 को फर्जी पुलिस मुठभेड़ की इस घटना में छात्र विकास रंजन, प्रशांत और हिमांशु रंजन मारे गए थे। तीनों मृतक छात्र आशियाना बाजार स्थित एक टेलीफोन बूथ पर फोन करने गए थे, जहां बिल भुगतान को लेकर झड़प हो गई थी।

इसके बाद बूथ मालिक और अन्य दुकानदारों ने मिलकर इन तीनों छात्रों को बंदी बनाकर काफी पिटाई की थी।

आरोप था कि बाद में शास्त्रीनगर थाने के तत्कालीन प्रभारी शम्से आलम के नेतृत्व में एक पुलिस टीम वहां पहुंची और तीनों छात्रों को डकैत बताते हुए कथित फर्जी मुठभेड़ कर उनकी हत्या कर दी थी।

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