तिरुवनंतपुरम, 13 नवंबर (आईएएनएस)। महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने यहां एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पूरी दुनिया में महिलाओं के लिए बढ़ते खतरों पर चिंता जताई।
केरल के राज्यपाल और सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व प्रधान न्यायाधीश पी.सदाशिवम ने लैंगिक समानता पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन-1 (आईसीजीई-1) का गुरुवार को उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत में महिलाओं की स्थिति चिंता का विषय है। महिलाओं के अधिकारों के लिए बने कानूनों के बारे में जागरूकता होनी ही चाहिए।
सम्मेलन का आयोजन केरल सरकार के जेंडर पार्क और युनाइटेड नेशंस वीमेन ने किया है।
सदाशिवम ने कहा, “बहुत कम महिलाएं कानूनों के बारे में जानती हैं। कानूनी सशक्तिकरण जरूरी है और महिलाओं को अभियान चलाकर इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।”
लंदन स्कूल आफ इकोनामिक्स में लैंगिक सशक्तिकरण की प्रोफेसर नायला कबीर ने अपना शोध पेश किया। इस शोध में आंकड़ों से साबित किया गया है कि लैंगिक समानता से देश के विकास में मदद मिलती है।
सम्मेलन में किन्नर सामाजिक कार्यकर्ता अक्कई पद्माशली को केरल सरकार की किन्नर पर बनी नीति की प्रति भेंट की गई।
पद्माशली ने कहा कि देश को किन्नर समुदाय के बारे में और अनुकूल होना चाहिए। उन्होंने कहा, “समाज और कानून अब भी हमारी पहचान को अपमानित करते हैं।”
सम्मेलन में पूरी दुनिया से सैकड़ों बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और छात्र हिस्सा ले रहे हैं।
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