हैदराबाद, 13 नवंबर (आईएएनएस)। सऊदी अरब की मीडिया शख्सियत और लेखिका समीरा अजीज को उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए मौलाना अबुल कलाम आजाद विशेष पुरस्कार से नवाजा गया है। वह सऊदी अरब की पहली महिला हैं जिन्हें उर्दू को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया है।
हैदराबाद, 13 नवंबर (आईएएनएस)। सऊदी अरब की मीडिया शख्सियत और लेखिका समीरा अजीज को उर्दू भाषा को बढ़ावा देने के लिए मौलाना अबुल कलाम आजाद विशेष पुरस्कार से नवाजा गया है। वह सऊदी अरब की पहली महिला हैं जिन्हें उर्दू को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया है।
तेलंगाना सरकार ने समीरा (35) को यह पुरस्कार 11 नवंबर को मौलाना आजाद की जयंती पर दिया। मौलाना आजाद की जयंती तेलंगाना में अल्पसंख्यक कल्याण दिवस के रूप में मनाई जाती है।
समीरा पत्रकार, उपन्यासकार, कवयित्री, फिल्मकार हैं और रेडियो पर कार्यक्रम पेश करती हैं। पुरस्कार मिलने से खुश हैं। उन्होंने कहा, “इस विशिष्ट सम्मान और मान्यता को पाने पर मैं बहुत खुश हूं।”
समीरा उर्दू भाषा में उपन्यास लिखने वाली पहली सऊदी लेखिका हैं। वह बीते 15 सालों से उर्दू और अंग्रेजी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वह अंग्रेजी समाचार पत्र सऊदी गजट की वरिष्ठ अंतर्राष्ट्रीय संपादक रह चुकी हैं। इस वक्त वह समाचार सेवा एशियन इनफारमेशन एजेंसी की अध्यक्ष हैं।
समीरा ने आईएएनएस से कहा, “कई सऊदी परिवार उर्दू बोलते हैं। मैं इस बात पर शोध करना चाहती हूं कि उर्दू उन तक कैसे पहुंची और वे इस भाषा से क्यों प्रेम करते हैं? चूंकि हैदराबाद उर्दू का गढ़ है, इसलिए मुझे लगता है कि इस मामले में पीएचडी के लिए यह सबसे बेहतर जगह रहेगी।”
जेद्दा की रहने वाली समीरा इस वक्त मुंबई में हैं। वह अपनी पहली बालीवुड फिल्म ‘रीम’ के सिलसिले में मुंबई में हैं। यह फिल्म उनकी अपनी एक कहानी पर आधारित है।
भारत उनके लिए नया नहीं है। उन्होंने बताया, “मैं बीते 22 साल से यहां आ रही हूं। जुहू तट पर मैंने अपना पहला उर्दू उपन्यास लिखा था।”
समीरा का जन्म 1979 में एक पाकिस्तानी प्रवासी परिवार में हुआ था। वह महिला अधिकारों के लिए भी काम करती हैं। वह सऊदी अरब में महिलाओं के वाहन चलाने के अधिकार का समर्थन करती हैं।
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