मुद्दे सुलझने से बैंकों पर दबाव घटेगा : जेटली

नई दिल्ली, 23 नवंबर (आईएएनएस)। विभिन्न सेक्टरों के मुद्दे सुलझने से बुरे ऋण के कारण सरकारी बैंकों द्वारा झेला जा रहा दबाव धीरे-धीरे कम होता जाएगा। यह बात वित्तमंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कही।

सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक करने के बाद जेटली ने यहां संवाददाताओं से कहा, “सरकारी बैंकों के स्वास्थ्य पर चर्चा हुई। खासकर पहले से चली आ रही समस्याओं जैसे गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) और बुरे ऋण पर चर्चा हुई।”

वित्त मंत्री ने कहा, “समस्या आगे बनी रहती हैं, लेकिन एनपीए की स्थिति बेहतर होगी।”

उन्होंने कहा, “बिजली क्षेत्र में सुधार होने के बाद वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के कारण पैदा हुआ दबाव खत्म हो जाएगा। राजमार्ग क्षेत्र की स्थिति बेहतर होनी शुरू हो गई है।”

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि बैंक अधिकारियों ने इस्पात और एल्यूमीनियम क्षेत्रों के बारे में कुछ सुझाव दिए हैं।

मंत्री ने कहा, “इस्पात क्षेत्र की समस्याओं और सरकार द्वारा इससे संबंधित उठाए गए कदमों पर भी चर्चा हुई। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजस्व विभाग के साथ मिलकर बैंकों के लिए और कदम उठाएंगे।”

जून अंत तक सरकारी बैंकों को एनपीए बढ़कर 6.03 फीसदी हो गया था, जो मार्च 2015 में 5.20 फीसदी था।

उन्होंने कहा, “बैंकों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक के सुझाए गए कदमों के कार्यान्वयन से स्थिति बेहतर होगी। सरकार भी विभिन्न क्षेत्रों की समस्या दूर करने के लिए काम कर रही है।”

जेटली ने मौजूदा कारोबारी साल में बैंकों में निवेश के लिए बजट में 7,940 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

उन्होंने कहा कि इसकी पहली खेप बैंकों में जा चुकी है।

गत महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अगले कुछ साल में सरकार सरकारी बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये का संचार करेगी।

जेटली ने सितंबर में कहा था कि सरकार सरकारी बैंकों में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 52 फीसदी करने पर विचार कर सकती है।

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