पणजी, 27 नवंबर (आईएएनएस)। केरल में जुटे फिल्मकारों और कलाकारों ने यहां गुरुवार को 46वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीटीआई) के छात्रों को प्रवेश करने से रोके जाने पर नाराजगी जताई और आयोजकों से माफी मांगने को कहा।
यहां जारी संयुक्त बयान में के.आर. मेनन (फिल्मकार), सन्नी जोसफ (सिनेमेटोग्राफर), प्रकाश बारे (अभिनेता), के.एम. कमल (फिल्मकार) और केरल स्थित भारतीय फिल्म समितियों के महासंघ व 15 अन्य ने कहा है, “हम इफ्फी अधिकारियों की अलोकतांत्रिक और अन्यायपूर्ण कृत्य की निंदा करते हैं और उनसे एफटीआईआई के छात्रों से माफी मांगने की मांग करते हैं।”
यह संयुक्त बयान इफ्फी के आयोजकों के बर्ताव के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के तहत एफटीआईआई के छात्रों व पूर्व छात्रों द्वारा दो दिन समानांतर फिल्मोत्सव का आयोजन किए जाने के अगले दिन जारी किया गया।
एफटीआईआई के छात्रों के प्रवक्ता ने कहा कि दो दर्जन छात्रों का इफ्फी के लिए पंजीकरण करने से इनकार कर दिया गया। उद्घाटन समारोह का विरोध कर रहे दो पूर्व छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया और एफटीटीआई के लोगो वाली टी-शर्ट पहने एक छात्र को पुलिस ने कई घंटों तक हिरासत में रखा।
एफटीटीआई के अध्यक्ष पद पर अभिनेता गजेंद्र चौहान की नियुक्ति के खिलाफ संस्थान के छात्रों ने 12 जून से 139 दिनों तक हड़ताल की थी। उनका कहना था कि चौहान इस पद के योग्य नहीं हैं। हड़ताल खत्म करते वक्त छात्रों ने कहा था किचौहान के पद पर बने रहने तक उनका विरोध जारी रहेगा।
केरल के फिल्मकारों ने कहा कि इफ्फी को स्वतंत्रता, रचनात्मकता, लोकतंत्र और बिरादरी के एक उत्सव के रूप में देखा जाता रहा है। साल दर साल यह महोत्सव रचनात्मक विचारों का एक खुला मंच बनता गया, लेकिन इस साल यह आयोजन अभिव्यति व अन्य हर तरह की आजादी छीने जाने के खिलाफ खड़ा होने के लिए जाना जाएगा।
इफ्फी के आयोजकों ने हालांकि एफटीआईआई के छात्रों द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। आयोजकों को छात्रों का विरोध प्रदर्शन राजनीति से प्रेरित लगता है।
महोत्सव के निदेशक सी. सेंथिल राजन ने आईएएनएस से कहा कि यह महोत्सव सिनेमा का जश्न मनाने के लिए है, न कि राजनीति करने के लिए।
राजन ने कहा, “पुलिस ने फिल्में देखने आए किसी भी मेहमान और फिल्म संस्थान के छात्र को नहीं रोका। हमारा लक्ष्य फिल्में प्रदर्शित करना है। न तो राजनीतिक करने का स्थल है और न ही विरोध प्रदर्शन का।”
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