नई दिल्ली, 27 नवंबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देश के विकास में पूर्ववर्ती सरकारों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता।
लोकसभा में ‘संविधान के प्रति प्रतिबद्धता’ विषय पर विशेष चर्चा में भाग लेते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “कोई नहीं कह सकता कि पहले की सरकारों ने देश के लिए कुछ नहीं किया। मैं आज भी यह नहीं कह रहा हूं। यही मैंने लालकिले से भी कहा था।”
मोदी ने कहा कि भारत का निर्माण महाराजाओं ने नहीं बल्कि आम लोगों और सभी सरकारों ने किया है।
संविधान निर्माताओं की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा कि भारत जैसा संविधान बनाना आसान काम नहीं था।
मोदी ने कहा कि चर्चा का मूल भाव ‘हम’ का विचार होना चाहिए न कि ‘आप’ और ‘मैं’ का।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है कि लोग संविधान के सभी पक्षों को जानें। यह सांसदों की जिम्मेदारी है कि वे लोगों तक संविधान की भावनाओं को पहुंचाएं।
प्रधानमंत्री ने बी.आर अंबेडकर की इस बात के लिए प्रशंसा की कि इतना अधिक भेदभाव बर्दाश्त करने के बावजूद उन्होंने बिना किसी पूर्वाग्रह के संविधान बनाया।
उन्होंने कहा, “यह अंबेडकर के व्यक्तित्व का चरम था कि उन्होंने सभी अपमान सहे लेकिन उनके अंदर बदले की भावना नहीं थी। ऐसी कोई भावना संविधान में नहीं दिखी।”
सदन में संविधान पर यह चर्चा अंबेडकर की 125वीं जयंती के मौके पर हो रहे कार्यक्रमों के तहत की गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के लिए संविधान बनाना निश्चित ही चुनौतीपूर्ण रहा होगा क्योंकि यहां अलग-अलग मतों और रीति-रिवाज के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा संविधान बनाने वालों के लिए सहज ही मन में आदर पैदा होता है।
मोदी ने कहा कि संविधान बनाने में अंबेडकर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है लेकिन इस काम में अन्य लोगों ने भी योगदान दिया था।
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